भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) उत्तर प्रदेश सरकार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करके मिर्ज़ापुर में एक आदिवासी आंदोलनकारी, कार्यकर्ता तथा खेत मजदूर यूनियन के सदस्य हिम्मत कोल की हत्या की कटु निंदा करते हुए तीव्र विरोध किया है.
पार्टी का कहना है कि रेंज तथा हलिया थानान्तर्गत वनवासियों और आदिवासियों पर बेपनाह ज़ुल्म का सिलसिला जारी है. जिसके खिलाफ CPI के नेतृत्व में आदिवासियों तथा वनवासियों को संगठित करना शुरू किया गया है.
लोग अपने बुनियादी अधिकारों के लोइये खरे हो रहे है. जल, जंगल, जमीन पर वहां के मूल निवासियों के अधिकार के लिए आंदोलन का सिलसिला शुरू है. जिससे वनमाफियाओं, भ्रष्ट वन रेंजर तथा दलालों में खलबली मची हुई है.
CPI का कहना है कि बबुरा रघुनाथ सिंह और हिम्मत कोल इन आंदोलनों में आगे बढ़कर हिस्सा ले रहे थे. वन रेंजर, वन माफियाओं और कोल जाति के स्वयंभू ठेकेदारों की ओर से हिम्मत कोल को धमकियां दी जा रही थीं. कुछ ही दिन पहले इनके साथ ही दो अन्य लोगों को फर्जी आरोपों में जेल भेजा गया था.
और बुधवार की रात्रि में घर जाते हुए उनकी हत्या कर दी गयी. भाजपा की योगी सरकार में अनुसूचित जातियों तथा जनजातियों पर हमले इस हद तक बढ़ गये हैं कि हक के लिए आवाज उठाने वालों की हत्या की जा रही है.
CPI ने हिम्मत कोल की हत्या का पर्दाफाश करने तथा एफआईआर में नामजद अभियुक्तों को फौरन गिरफ्तार करने की मांग की है.





