सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के एक आरोपी अंजनी सिंह को बरी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट और ट्रायल कोर्ट को उसे संदेह का लाभ देना चाहिए था। अंजनी पर दुर्गा पूजा के दौरान भीड़ पर गोली चलाने का आरोप था, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी। शीर्ष अदालत ने मुख्य गवाह की गवाही को अपर्याप्त माना है।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को हत्या के आरोप से एक व्यक्ति को बरी कर दिया और कहा कि यह एक ऐसा मामला था, जिसमें हाई कोर्ट और ट्रायल कोर्ट को उसे संदेह का लाभ देना चाहिए था।
जस्टिस मनोज मिश्रा और जोयमाल्या बागची बागची की पीठ अंजनी सिंह द्वारा जुलाई 2019 में इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के विरुद्ध दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी। हाई कोर्ट ने बलिया के ट्रायल कोर्ट द्वारा हत्या और अन्य आपराधिक आरोपों में दोषी ठहराए जाने के फैसले को बरकरार रखा था।
क्या है आरोप?
एफआइआर के अनुसार, अंजनी सिंह ने अपने भाई के साथ मिलकर 20 अक्टूबर, 2004 को दुर्गा पूजा उत्सव के दौरान एक गांव में कहासुनी के बाद लगभग 100 लोगों की भीड़ पर अंधाधुंध फायरिंग की। दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि मुख्य गवाह सहित कई अन्य लोग घायल हो गए।
SC ने क्या कहा?
शीर्ष अदालत ने कहा कि मुख्य गवाह की गवाही अंजनी को दोषी ठहराने का एकमात्र आधार नहीं बन सकती, खासकर तब जब अन्य घायल गवाहों ने उसकी पहचान नहीं की। यह मानना मुश्किल है कि कैसे एक व्यक्ति अपने दो अन्य साथियों के साथ 100 से अधिक लोगों की उग्र भीड़ के बीच से भाग निकला। कथित हमलावर के पास केवल एक देसी पिस्तौल थी, जो आम तौर पर एक गोली चलाने वाला हथियार होता है, जबकि उसके दो साथी निहत्थे थे।
पीठ ने यह भी कहा कि जांच के दौरान पिस्तौल नहीं मिली। मुख्य गवाह की गवाही पर ध्यान देते हुए अदालत ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि कई हमलावरों ने हथियारों से लैस होकर गोलीबारी की थी।





