बस्ती। बस्ती जनपद बार एसोसिएशन ने एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए न्यायिक कार्यों का पूर्ण बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। यह फैसला एसोसिएशन के अध्यक्ष अमर सेन सिंह की अध्यक्षता में आयोजित एक बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया। अधिवक्ताओं ने उच्च न्यायालय के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के आवास से अरबों रुपये की बरामदगी के मामले को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की, साथ ही बस्ती कचहरी में व्याप्त भ्रष्टाचार और मुंशीराज के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। बैठक में अधिवक्ताओं ने कई गंभीर मुद्दों पर चर्चा की। सबसे प्रमुख मुद्दा रहा नाबालिग आदर्श उपाध्याय की पुलिस द्वारा कथित तौर पर अवैध वसूली के दौरान हत्या का मामला, जिसके विरोध में वकीलों ने एकजुटता दिखाई। इसके अलावा, कचहरी में कार्यरत निजी मुंशियों पर गंभीर आरोप लगाए गए। अधिवक्ताओं का कहना है कि ये मुंशी फाइलों से महत्वपूर्ण कागजात चोरी कर विपक्षी पक्ष को सौंपते हैं, तारीखों में हेराफेरी करते हैं और फैसलों को प्रभावित करने के लिए दलाली का धंधा चलाते हैं।
इन समस्याओं से त्रस्त अधिवक्ताओं ने साफ कहा कि जब तक इन मुद्दों का समाधान नहीं होता, वे न्यायिक कार्यों में सहयोग नहीं करेंगे। एसोसिएशन के अध्यक्ष अमर सेन सिंह ने कहा, “न्याय व्यवस्था की गरिमा को बनाए रखना हमारा कर्तव्य है, लेकिन जब व्यवस्था में ही भ्रष्टाचार और अनियमितताएं इस हद तक बढ़ जाएं कि न्याय मिलना मुश्किल हो जाए, तो चुप रहना संभव नहीं है। हमारा यह कदम एक चेतावनी है कि अब सुधार जरूरी है।” बैठक में मौजूद वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप पांडेय ने भी इस निर्णय का समर्थन करते हुए कहा कि यह कदम न केवल अधिवक्ताओं के हित में है, बल्कि आम जनता को भी स्वच्छ न्याय व्यवस्था देने की दिशा में एक पहल है। अधिवक्ताओं ने उच्च न्यायालय के न्यायाधीश से जुड़े मामले पर भी सवाल उठाए।
उनका कहना है कि इस तरह की घटनाएं न्यायपालिका पर जनता के भरोसे को कमजोर करती हैं। रजनीश दूबे ने कहा, “जब न्याय देने वाले ही संदेह के घेरे में हों, तो आम आदमी कहां जाए? हमारी मांग है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को सजा मिले।” इस बैठक में वरिष्ठ अधिवक्ता अजय त्रिपाठी, अनिल शुक्ला, रमेश पांडेय, शिवशंकर श्रीवास्तव सहित कई अन्य प्रमुख वकील शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में इस बहिष्कार के निर्णय का समर्थन किया। बार एसोसिएशन ने अपने इस फैसले की सूचना संबंधित अधिकारियों को लिखित रूप में देने का निर्णय लिया है, ताकि प्रशासन इस दिशा में ठोस कदम उठाए।अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि यह बहिष्कार तब तक जारी रहेगा, जब तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती। इन मांगों में कचहरी में मुंशीराज और भ्रष्टाचार पर रोक, नाबालिग आदर्श उपाध्याय की हत्या के दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई और उच्च न्यायालय के न्यायाधीश से जुड़े मामले की पारदर्शी जांच शामिल हैं। इस फैसले से बस्ती की न्यायिक व्यवस्था पर व्यापक असर पड़ने की संभावना है।