गोरखपुर की सांस्कृतिक चेतना को क्षेत्रीय कला प्रदर्शनी ने किया समृद्ध: डॉ मंगलेश
त्रि दिवसीय गोरखपुर क्षेत्रीय कला प्रदर्शनी के समापन में दर्शकों ने देखा कला के विविध रंग
गोरखपुर। राज्य ललित कला अकादमी, संस्कृति वि भाग उत्तर प्रदेश एवं महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय, गोरखपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित गोरखपुर क्षेत्रीय कला प्रदर्शनी का समापन सत्र कला, संस्कृति और सृजनात्मक संवाद का एक अत्यंत गरिमामय अवसर रहा। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सुरिंदर सिंह, विशिष्ट अतिथि के रूप में गोरखपुर के महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, वरिष्ठ चित्रकार एवं ललित कला एवं संगीत विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. भारत भूषण ने कलाकारों को शुभाशीष दिया ।
मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. सुरिंदर सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि कला केवल सौंदर्य का साधन नहीं, बल्कि समाज की चेतना और सांस्कृतिक स्मृति का संवाहक है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की भूमिका केवल अकादमिक ज्ञान तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि कला, संस्कृति और रचनात्मकता के संरक्षण एवं संवर्धन में भी उनकी सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। प्रो. सिंह ने गोरखपुर क्षेत्रीय कला प्रदर्शनी को पूर्वांचल की कलात्मक प्रतिभाओं के लिए एक सशक्त मंच बताते हुए कहा कि इस प्रकार की प्रदर्शनियां युवा कलाकारों को आत्मविश्वास देती हैं और उन्हें राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में सहायक होती हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि आज के तकनीकी युग में जब भौतिकता और उपभोक्तावाद का प्रभाव बढ़ रहा है, तब कला मनुष्य को संवेदनशील बनाए रखने का कार्य करती है। चित्रकला, मूर्तिकला, ग्राफिक आर्ट और समकालीन कलाएं समाज के भीतर छिपे भावों, संघर्षों और आशाओं को अभिव्यक्त करती हैं। विश्वविद्यालय भविष्य में भी राज्य ललित कला अकादमी के साथ मिलकर ऐसे आयोजन करता रहेगा, जिससे कला और शिक्षा के बीच सेतु मजबूत हो।
विशिष्ट अतिथि महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने अपने उद्बोधन में कहा कि किसी भी नगर की पहचान केवल उसकी भौगोलिक सीमाओं से नहीं, बल्कि उसकी सांस्कृतिक गतिविधियों से बनती है। गोरखपुर ने हमेशा साहित्य, संगीत और कला के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान दिया है और यह प्रदर्शनी उसी परंपरा का सशक्त उदाहरण है। उन्होंने कहा कि नगर निगम भविष्य में भी कला एवं संस्कृति से जुड़े आयोजनों को हर संभव सहयोग देगा, ताकि शहर की सांस्कृतिक चेतना और अधिक समृद्ध हो सके।
डॉ. श्रीवास्तव ने कलाकारों की सामाजिक भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कलाकार समाज का दर्पण होता है। वह अपनी कृतियों के माध्यम से समाज की सच्चाइयों को सामने लाता है और लोगों को सोचने के लिए प्रेरित करता है। वरिष्ठ चित्रकार डॉ. भारत भूषण ने कहा कि कला केवल दृश्य अनुभव नहीं, बल्कि एक आंतरिक अनुभूति है। कलाकार जब सृजन करता है, तो वह अपने अनुभव, संवेदना और विचारों को रंगों एवं रेखाओं के माध्यम से अभिव्यक्त करता है। डॉ. भूषण ने कहा कि समकालीन समय में कलाकारों के सामने अनेक चुनौतियां हैं, लेकिन वही चुनौतियां नए प्रयोगों और नवीन अभिव्यक्तियों का मार्ग भी खोलती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि परंपरा और आधुनिकता के संतुलन से ही सशक्त कला का जन्म होता है। युवा कलाकारों को चाहिए कि वे अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहें विशिष्ट अतिथि संगीत नाट्य अकादमी के पूर्व सदस्य डॉ शरद मणि त्रिपाठी ने कहा कि क्षेत्रीय कला प्रदर्शनी ने गोरखपुर की कला संस्कृति को समृद्ध करने का ऐतिहासिक कार्य किया है ।क्षेत्रीय कला प्रदर्शनी गोरखपुर और पूर्वांचल की कला यात्रा में एक स्मरणीय अध्याय के रूप में सदैव याद की जाएगी।
राज्य ललित कला अकादमी, संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश के सदस्य एवं क्षेत्रीय कला प्रदर्शनी के संयोजक डॉ. संदीप कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि गोरखपुर क्षेत्रीय कला प्रदर्शनी केवल चित्रों और शिल्प कृतियों का प्रदर्शन मात्र नहीं है, बल्कि यह रचनात्मक संवाद, सांस्कृतिक चेतना और कलात्मक संवेदनाओं के आदान-प्रदान का सशक्त माध्यम है। डॉ. श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में राज्य ललित कला अकादमी, संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अकादमी द्वारा निरंतर क्षेत्रीय स्तर पर कला गतिविधियों को प्रोत्साहन देने से नवोदित और वरिष्ठ कलाकारों को समान मंच प्राप्त हो रहा है। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय, गोरखपुर के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन के सकारात्मक दृष्टिकोण और सहयोग से यह प्रदर्शनी सफलतापूर्वक आयोजित हो सकी। कुलपति प्रो सुरिंदर सिंह जी और कुलसचिव डॉ प्रदीप कुमार राव जी एवं विश्वविद्यालय परिवार के प्रति विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया।
संयोजक डॉ. संदीप कुमार श्रीवास्तव ने प्रदर्शनी में भाग लेने वाले सभी कलाकारों की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि विभिन्न माध्यमों, शैलियों और विषयों में सृजित कलाकृतियाँ समकालीन समाज की संवेदनाओं, परंपराओं और आधुनिक दृष्टि को सशक्त रूप में प्रस्तुत करती हैं।सत्र का संचालन सिद्धार्थ दुबे और ऋतु जी ने किया। प्रदर्शनी में प्रमुख रूप से डॉ शशिकांत सिंह ,डॉ नवीन श्रीवास्तव, डॉ गौरी शंकर चौहान, राघवेंद्र प्रताप यादव , सुनील कुमार , प्राची श्रीवास्तव , संतोष कुमार श्रीवास्तव, निलय कुमार, आशीष कुमार रावत,रीना जायसवाल ,आदित्य वर्मा , सुशील चंद्र, सुशील गुप्ता, नवाज अहमद, विवेक कुमार साहनी, अभिषेक कुमार, संदीप कन्नौजिया, कृति वर्मा, वंदना सिंह , अजय कुमार, डॉ दिलीप साहनी, देवानंद गुप्ता, पूजा सिंह, भास्कर विश्वकर्मा, शिवम् कुमार शर्मा, महेश वर्मा, अनुश्री साहनी, गौरव गुप्ता, तृप्ति श्रीवास्तव, डॉ दुर्गेश नंदनी, डॉ रेखा रानी शर्मा, सिद्धी अग्रवाल, दुर्गेश प्रजापति, प्रांजलि गुप्ता, सुरेंद्र प्रजापति, संतोष श्रीवास्तव , शिखर त्रिपाठी, संजय कुमार सिंह, रोशन सिंह, संजीव गुप्ता,ममता श्रीवास्तव केतन, काशी प्रसाद, अंजली मिश्रा,शिवांगी मोदनवाल , हर्षिका सिंह, डॉ रमा शर्मा, प्रवीण श्रीवास्तव,अजय कुमार,दिलेनूर फातिमा,विजय लक्ष्मी, शीला शर्मा,अभय वर्मा, अभिषेक कुमार ,सुरुचि राय, के कलाकृतियों को दर्शकों ने सराहा। सत्र में प्रमुख रूप से रामकृष्ण मिश्रा , बृजनंदन श्रीवास्तव, सागर जायसवाल, खुशी गुप्ता, यादवेन्द्र गोस्वामी, उत्कर्ष ओझा, अभिषेक मिश्रा, अभिषेक चौरसिया,अरुण विश्वकर्मा, उजाला, अतिका, अनुराधा, आकांक्षा, अर्पिता ,गुड़िया ने सहयोग किया ।





