नाबालिग की मौत पर फूटा गुस्सा, भाजपा युवा मोर्चा और विद्यार्थी परिषद ने किया प्रदर्शन

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बस्ती। जनपद के दुबौलिया थाना क्षेत्र के उभाई गांव में नाबालिग आदर्श उपाध्याय की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस घटना से आक्रोशित स्थानीय लोगों और राजनीतिक संगठनों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) युवा मोर्चा के नगर अध्यक्ष विशाल गुप्ता और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के जिला संयोजक विकास कसौधन के नेतृत्व में दर्जनों कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट पर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने नायब तहसीलदार स्वाति सिंह के माध्यम से जिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें दुबौलिया थानाध्यक्ष जितेंद्र सिंह और दो सिपाहियों, शिवम सिंह व सुनिल सिंह, के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि नाबालिग आदर्श को पुलिस ने एक मामूली विवाद के चलते थाने ले जाकर बेरहमी से पीटा, जिसके कारण उसकी हालत बिगड़ गई और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। कार्यकर्ताओं ने पीड़ित परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान करने और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की भी मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी और आक्रोश से कलेक्ट्रेट परिसर गूंज उठा। कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। इस घटना को लेकर भाजपा जिलाध्यक्ष विवेकानंद मिश्रा भी हरकत में आए। वे पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और पीड़ित परिवार से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की। उन्होंने पुलिस की कार्यशैली पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि यह घटना कानून व्यवस्था पर सवाल उठाती है। उन्होंने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। मिश्रा ने कहा, “एक नाबालिग के साथ ऐसी बर्बरता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

दोषी पुलिसकर्मियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।” आदर्श के परिजनों का आरोप है कि सोमवार को पुलिस ने उसे मारपीट के एक मामले में पूछताछ के लिए थाने ले जाया था। वहां उसकी बेरहमी से पिटाई की गई, जिसके बाद उसकी हालत बिगड़ गई। मंगलवार को हालत गंभीर होने पर उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। परिजनों का कहना है कि पुलिस ने उन्हें समय पर सूचना भी नहीं दी और मामले को दबाने की कोशिश की। परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया और शव को पोस्टमार्टम हाउस की एंबुलेंस में रखकर न्याय की मांग की।बढ़ते आक्रोश और प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की है। पुलिस अधीक्षक (एसपी) बस्ती ने दुबौलिया थानाध्यक्ष जितेंद्र सिंह को लाइन हाजिर कर दिया, जबकि दो सिपाहियों, शिवम सिंह और सुनिल सिंह, को निलंबित कर उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं।

जिला मजिस्ट्रेट रवीश कुमार गुप्ता ने घटना की जांच के लिए दो सदस्यीय समिति गठित की है और जल्द रिपोर्ट तलब की है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) ओपी सिंह ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। इस मामले ने सियासी रंग भी ले लिया है। भाजपा और समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता पीड़ित परिवार के समर्थन में एकजुट हो गए। हरैया विधायक अजय सिंह और सपा विधायक महेंद्र नाथ यादव भी अस्पताल पहुंचे और परिजनों को न्याय का भरोसा दिलाया। दोनों दलों के नेताओं ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की। प्रदर्शन में शामिल कार्यकर्ताओं ने कहा कि यह घटना योगी सरकार के जीरो टॉलरेंस नीति पर सवाल खड़ा करती है।

उभाई गांव के ग्रामीणों में पुलिस के खिलाफ गुस्सा अभी भी थमा नहीं है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने पहले मामले को दबाने की कोशिश की और अब कार्रवाई का दबाव बढ़ने पर ही कदम उठाया गया। ग्रामीणों ने शव को सड़क पर रखकर भी प्रदर्शन किया था, जिसे बाद में नेताओं के समझाने पर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। फिलहाल, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मजिस्ट्रियल जांच के नतीजों का इंतजार किया जा रहा है। इस घटना ने जिले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा दिए हैं। प्रदर्शनकारी और पीड़ित परिवार सख्त कार्रवाई और न्याय की मांग पर अड़े हैं। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है। यह मामला आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है।

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