अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के प्रोफेसर मोहम्मद आजम खान ने इंग्लैंड के यूनिवर्सिटी ऑफ ग्रेटर मैनचेस्टर, बोल्टन में आयोजित “इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन एम्पावरिंग लीडर्स फॉर ग्लोबल कंटेम्परेरी बिजनेस” में अपना शोधपत्र प्रस्तुत किया। उनका शोधपत्र “इकनॉमिक डुअलिटी एंड ट्रांसजेंडर इन्क्लूजन इन अर्बन इंडियाः एविडेंसेज फ्रॉम दिल्ली-एनसीआर, इंडिया” शीर्षक पर आधारित था।
प्रो. खान के शोध को अमर्त्य सेन के कैपेबिलिटी एप्रोच और क्वीयर पॉलिटिकल इकनॉमी के दृष्टिकोण से विश्लेषित किया गया, जिसमें उन्होंने शहरी भारत में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों द्वारा झेली जा रही सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों पर प्रकाश डाला। शोध में प्रो. आजम ने बताया कि केवल औपचारिक आर्थिक समावेशन से ट्रांसजेंडर समुदाय को गरिमा, स्थिरता या सशक्तिकरण की गारंटी नहीं मिलती, जिससे यह स्पष्ट होता है कि रोजगार और आय वितरण में अभी भी संरचनात्मक असमानताएँ बनी हुई हैं।
अध्ययन में उन्होंने यह भ्ज्ञी सुझाव दिया गया कि आर्थिक द्वैत को समाप्त करने और ट्रांसजेंडर समुदाय के वास्तविक आर्थिक समावेशन को सुनिश्चित करने के लिए संरचनात्मक सुधार आवश्यक हैं, जिनमें आरक्षण आधारित भर्ती नीतियाँ, वेतन समानता तंत्र, और लक्षित वित्तीय सेवाएँ शामिल की जानी चाहिए।
अपने इंग्लैंड प्रवास के दौरान, प्रो. खान ने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की वेस्टन लाइब्रेरी का भी दौरा किया, जहाँ उन्होंने समान विकास और आर्थिक न्याय से संबंधित समकालीन मुद्दों पर विद्वानों से विचार-विमर्श किया।
अर्थशास्त्र विभाग के अध्यक्ष, प्रो. शहरोज आलम रिजवी ने प्रो. खान को अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक विमर्श में उनके सार्थक योगदान और वैश्विक शोध मंच पर एएमयू का प्रतिनिधित्व करने के लिए बधाई दी।





