कच्चे तेल में तेज उछाल और भू-राजनीतिक तनाव के चलते MCX और NSE ने क्रूड ऑयल ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट्स में बड़े बदलाव किए हैं। एक्सचेंजों ने ट्रेडर्स को अधिक विकल्प देने और कीमतों के बड़े दायरे को कवर करने के लिए स्ट्राइक प्राइसेज की संख्या बढ़ा दी है।
कच्चे तेल में तेज उछाल के बीच MCX और NSE ने क्रूड ऑयल ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट्स में बड़ा बदलाव किया है। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध जैसी स्थिति के कारण एक्सचेंजों ने स्ट्राइक प्राइसेज की संख्या बढ़ा दी है, ताकि ट्रेडर्स को ज्यादा विकल्प मिल सकें।
MCX ने क्यों बढ़ाए स्ट्राइक प्राइसेज?
सबसे पहले MCX ने 2 मार्च से अपने क्रूड ऑयल ऑप्शंस ऑन फ्यूचर्स (100 बैरल) और क्रूड ऑयल मिनी ऑप्शंस (10 बैरल) में ‘नंबर ऑफ स्ट्राइक्स’ बढ़ा दिए। पहले 25 इन-द-मनी (ITM), 25 आउट-ऑफ-द-मनी (OTM) और 1 नियर-द-मनी स्ट्राइक मिलती थी, यानी कुल 51 स्ट्राइक।
अब इसे बढ़ाकर 75 ITM, 75 OTM और 1 नियर-द-मनी कर दिया गया है। यानी अब ट्रेडर्स के पास कुल 151 स्ट्राइक का दायरा होगा। यह बदलाव मौजूदा और आने वाले दोनों कॉन्ट्रैक्ट्स पर लागू होगा। हालांकि स्ट्राइक प्राइस का अंतर 50 रुपये ही रहेगा।
NSE ने क्या किया बदलाव?
इसके बाद NSE ने भी 2 मार्च 2026 के सर्कुलर में WTI क्रूड ऑयल ऑप्शंस ऑन फ्यूचर्स में न्यूनतम स्ट्राइक की संख्या बढ़ा दी। पहले 25 ITM, 25 OTM और 1 नियर-द-मनी स्ट्राइक के साथ 51 कॉल (CE) और 51 पुट (PE) ऑप्शन उपलब्ध थे।
अब इसे बढ़ाकर 50 ITM, 50 OTM और 1 नियर-द-मनी कर दिया गया है। यानी अब 101 कॉल और 101 पुट ऑप्शन उपलब्ध होंगे। यह नया ढांचा मार्च 2026 से एक्सपायर होने वाले कॉन्ट्रैक्ट्स पर लागू होगा।
एक्सचेंजों ने क्यों उठाया कदम?
एक्सचेंजों ने साफ कहा कि यह कदम बाजार में पर्याप्त स्ट्राइक उपलब्ध कराने और कीमतों के बड़े दायरे को कवर करने के लिए उठाया गया है। हाल ही में 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने ईरान में संयुक्त हमला किया, जिसके बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद करने का ऐलान किया।
यह मार्ग दुनिया के करीब 20% कच्चे तेल की सप्लाई से जुड़ा है। इसी वजह से क्रूड की कीमतों में तेज उछाल देखा गया है। जरूरत पड़ी तो स्ट्राइक प्राइस और बढ़ाए जा सकते हैं।





