गोण्डा में समाज कल्याण विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के अंतर्गत लगभग 2000 आवेदन लंबे समय से लंबित बताए जा रहे हैं, जिसके कारण गरीब और जरूरतमंद परिवारों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि समाज कल्याण विभाग की लापरवाही और मनमानी के चलते पात्र लाभार्थियों को बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के विवाह में आर्थिक सहायता प्रदान करना है, ताकि गरीब परिवारों पर विवाह का बोझ कम हो सके। लेकिन गोंडा जिले में इस योजना का लाभ समय पर न मिलने से कई परिवार परेशान हैं। बताया जा रहा है कि बड़ी संख्या में लोगों ने समय से आवेदन कर दिए थे, इसके बावजूद उनकी फाइलें विभाग में लंबित पड़ी हैं।
आवेदकों का कहना है कि जब भी वे समाज कल्याण कार्यालय में जानकारी लेने जाते हैं तो उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं मिलता। कई लोगों का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। इससे उन परिवारों में नाराजगी बढ़ती जा रही है जो इस योजना के माध्यम से अपनी बेटियों का विवाह कराने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी मामले को गंभीर बताते हुए जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आवेदन सही पाए गए हैं तो जल्द से जल्द उनका निस्तारण किया जाना चाहिए, ताकि गरीब परिवारों को योजना का लाभ मिल सके। दूरभाष के जरिए जब इस मामले में समाज कल्याण विभाग के अधिकारी से जान कारी ली गई तो उनका कहना है कि हमें नहीं पता की कितना आवेदन है देख कर बताएंगे सामूहिक विवाह योजना के कमेटी अध्यक्ष जिलाधिकारी है जब वह कहेंगे तभी सामूहिक विवाह संपन्न कराया जाएगा। हालांकि, आम लोगों की मांग है कि प्रशासन इस मामले को प्राथमिकता से लेकर जल्द समाधान करे, ताकि मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना का लाभ सही समय पर पात्र लोगों तक पहुंच सके।





