पीसीएस 2024 में ननद-भाभी श्रेया शर्मा और आकृति शुक्ला ने एक साथ सफलता हासिल की है। श्रेया कमर्शियल टैक्स ऑफिसर बनीं, जबकि आकृति को डिप्टी एसपी का पद मिला।
लखनऊ। सिविल सेवा की तैयारी अक्सर एक अकेली, संघर्षपूर्ण यात्रा मानी जाती है, लेकिन जब यही सफर साथ मिल जाए तो राहें आसान भी हो जाती हैं और मंजिलें और भी करीब। पीसीएस 2024 में भाभी-ननद की एक ऐसी ही प्रेरक जोड़ी ने सफलता हासिल कर एक मिसाल पेश की है।
श्रेया शर्मा, जिन्होंने कमर्शियल टैक्स ऑफिसर (रैंक 37) के पद पर सफलता पाई, बताती हैं कि यह उनका तीसरा प्रयास था। इससे पहले वह एक मेंस और एक साक्षात्कार दे चुकी थीं। श्रेया के पिता संजय शर्मा रेलवे में कार्यरत हैं और उनकी माता निर्मला शर्मा होममेकर हैं पति अमित शुक्ला एआइ इंजीनियर हैं।
बेंगलुरु में सीएजी कार्यालय में आडिटर की नौकरी करते हुए भी उनके मन में एक खालीपन था। नौकरी तो मिल गई थी, लेकिन संतुष्टि नहीं थी, क्योंकि मेरा सपना सिविल सर्विस ही था, श्रेया कहती हैं। शादी के बाद जब ससुराल गईं तो उनकी ननद आकृति शुक्ला के साथ मिलकर तैयारी करने का मौका मिला यहीं से इस सफलता की कहानी ने नई दिशा पकड़ी।
आकृति शुक्ला, जिन्होंने पीसीएस में 3वीं रैंक हासिल कर डिप्टी एसपी का पद पाया, वह बताती हैं कि यह उनका तीसरा प्रयास था। प्रयागराज की रहने वाली आकृति के पिता अखिलेश कुमार शुक्ला डिफेंस से रिटायर्ड हैं और माता कंचन शुक्ला गृहिणी हैं। वह कहती हैं कि संघर्ष बहुत रहा, कई बार लगा कि अब नहीं होगा, लेकिन भाभी के आने के बाद तैयारी का माहौल ही बदल गया, आकृति कहती हैं। दोनों साथ बैठकर पढ़ती थीं, डिस्कशन करती थीं और एक-दूसरे के नोट्स शेयर करती थीं।
आकृति बताती हैं कि जब वह एक समय पूरी तरह टूट गई थीं और तैयारी छोड़ने का मन बना लिया था, तब उनके बड़े पापा शेषधर शुक्ला जो स्वयं पीसीएस से रिटायर्ड हैं ने उन्हें दोबारा खड़ा किया और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। श्रेया और आकृति की यह कहानी बताती है कि जब परिवार साथ हो, तो कठिन से कठिन लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है। ननद-भाभी की यह जोड़ी न सिर्फ सफलता की मिसाल है, बल्कि यह भी दिखाती है कि साथ मिलकर की गई मेहनत कैसे सपनों को हकीकत में बदल सकती है।





