पेंशनरों की समस्याओं का निराकरण करने के साथ साथ निस्तारित प्रकरणों की सूची प्रति सप्ताह उपलब्ध करायें संबन्धित अधिकारियों को दिए निर्देश
महोबा। जिलाधिकारी गजल भारद्वाज की अध्यक्षता में बुधवार को कलेक्ट्रेट सभागार में पेंशनरों की समस्याओं को लेकर बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में डीएम से पेंशनरों की समस्यओं को सूना और अभियान चलाकर पेंशनरों की समस्याओं का निराकरण करने के साथ साथ निस्तारित प्रकरणों की सूची प्रति सप्ताह उपलब्ध करायें उक्त निर्देश संबन्धित अधिकारियों को दिए।
बैठक में जिलाधिकारी ने वरिष्ठ कोषाधिकारी डॉ. देवकुमार यादव को निर्देशित किया कि 2016 के पूर्व सेवानिवृत्त पेंशनरों की पुनरीक्षण न करने वाले अधिकारियों का वेतन रोका जाए। उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों, पेंशनरों की सुरक्षा के लिए कुशल क्षेम सबेरा योजना प्रारम्भ किये जाने के लिए पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजने के लिए अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व को निर्देश दिए साथ ही कहा कि जिला चिकित्सालय का आकस्मिक निरीक्षण कर आपातकालीन कक्ष में इमरजेंसी ड्रग के साथ उपकरणों की क्रिया शीलता की जांच कर अवगत करायें।
बैठक में वरिष्ठ नागरिक पेंशनर्स सेवा संस्थान के महामंत्री बीके तिवारी ने मृतक पेंशनर के भुगतान में देरी होने की समस्याओं से अवगत कराया, जिस पर जिलाधिकारी ने मृतक पेंशनरों को पारिवारिक पेंशन के भुगतान में होने वाले विलम्ब पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि स्व. राम ओंकार सिंह की पत्नी को सभी औपचारिकतायें पूर्ण कराकर एक सप्ताह में पेंशन भुगतान की कार्यवाई के निर्देश दिए। चिकित्सा प्रतिपूर्ति के प्रकरणों के समयबद्ध निस्तारण न होने एवं मुख्य चिकित्साधिकारी के बैठक में उपस्थित न होने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त की। बैठक में अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व कुंवर पंकज, कोषाधिकारी देवकुमार यादव, जिला बेसिक शिक्षाधिकारी राहुल मिश्रा, जिला विद्यालय निरीक्षण, ईश्वरी प्रसाद तिवारी, शिवकुमार त्रिपाठी, सुरेन्द्र श्रीवास्तव, लघुचन्द्र नारायण अरजरिया, पुष्पा सक्सेना आदि मौजूद रहे।
यूजीसी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नवीन नियमों के विरोध में वरिष्ठ नागरिक पेंशनर्स सेवा संस्थान के बैनर तले पेंशनरों ने एकजुट होकर राष्ट्रपति को सम्बोधित ज्ञापन जिलाधिकारी गजल भारद्वाज को सौंपा। ज्ञापन में पेंशनरों ने आरोप लगाया कि यूजीसी के हालिया नियम उच्च शिक्षा की स्वायत्तता, पारदर्शिता तथा सामाजिक न्याय की भावना के विपरीत हैं। इन नियमों से विश्वविद्यालयों की अकादमिक स्वतंत्रता प्रभावित होगी और सामान्य वर्ग सहित समाज के कमजोर वर्गों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
बताया कि संगठन पूर्व में भी केंद्र सरकार एवं संबंधित मंत्रालय को ज्ञापन भेजे गए हैं, लेकिन अब तक कोई सार्थक समाधान नहीं निकला है। ज्ञापन में प्रमुख रूप से यूजीसी के नए नियमों की समीक्षा, शिक्षाविदों व हितधारकों से पुनः परामर्श तथा जनहित में निर्णय लेने की मांग की गई है। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। बैठक में संगठन के अध्यक्ष सुनील शर्मा, महामंत्री बीके तिवारी, ईश्वरी प्रभुदयाल कुशवाहा, अरूण खरे, जगदीश सोनी, इन्द्रमा, गीता द्विवेदी, सहित बड़ी संख्या में पेंशनर्स उपस्थित रहे।





