महोबा। पैगम्बर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब की यौमे पैदाइश को धूमधाम के साथ मनाने को लेकर शुक्रवार को समदगर स्थित हजरत अब्दुल समद (अब्बा हुजूर) मजार परिसर में जुलूस-ए-मोहम्मदी के अध्यक्ष बदर फारुख हाशमी की अध्यक्षता में बैठक संपन्न हुई। बैठक में जुलूस में बड़े डीजे लेकर चलने पर पाबंदी लगाई गई है साथ ही छोटे डीजे और लाउडस्पीकर लेकर चलने पर जोर दिया गया। 5 सितम्बर को रवीउल्ल अव्वल त्योहार पर निकलने वाले जुलूस में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेने की मुस्लिम समाज के लोगों से अपील की।
खादिमाने कमेटी के अध्यक्ष अलताफ हुसैन ने कहा कि हजरत मोहम्मद साहब की यौमे पैदाइश हंसी खुशी से मनाए। इस दिन फातिहा दिलाने के साथ गरीबों और मिसकीनों को भर पेट खाना खिलाएं। मस्जिदों, मजारों और घरों में शानदार तरीके साथ सजावट करें और घरों में हरे परचन लगाएं। जुलूस-ए-मोहम्मदी को जोरदार तरीके से इस्लामी परचमों के बीच निकाले। उन्होंने कहा कि मोहम्मद साहब की यौम-ए-पैदाइश पर बड़े डीजे कताई न लेकर शामिल करें, बल्कि लोग माइक, लाउडस्पीकर में नातिया कलाम पढ़ते हुए चले साथ ही चौराहो चौराहो पर नबी के बावत खिताब भी किया जाए।
जुलूस-ए-मोहम्मदी के सदर सैयद बदर फारूख हाशमी ने बताया कि 5 सितम्बर को रवीउल्ल अव्वल त्योहार मनाया जा रहा है और इस दिन बब्बा हुजूर के अस्थाने से जुमे की नमाज के बाद दिन में दो बजे जुलूस-ए-मोहम्मदी का आगाज किया जाएगा और रात में साढ़े आठ बजे पठानपुरा मुहाल में समाप्त होगा। जुलूस में जींस और पेट पहनकर के बजाय कुर्ता पैजामा पहनकर मुस्लिम भाई समय से शामिल होकर कि हजरत मोहम्मद साहब की यौमे पैदाइश को धूमधाम के साथ मनाए। उन्होंने बैठक में मौजूद लोगों से जुलूस दौरान इस्लामी परचम लेकर पहुंचने की अपील की जिससे जुलूस-ए-मोहम्मदी इस्लामी परचामों से सराबोर दिखाई दे।
उन्होंने कहा कि कोई भी नौजवान अलग से कोई कार्य न करे, यदि कोई कार्य करना है तो पहले अध्यक्ष से सलाह मशविरा करें अन्यथा की स्थिति में वह अपने कार्य के लिए स्वयं जिम्मेदार होगे। उन्होंने कहा कि कोई भी बेवजह के नारे नहीं लगाए। जुलूस दौरान नबी के नारे लगाते वक्त कोई भी गुटखा पान आदि न खाए। बैठक में हाजी मोहम्मद सईद, आमिलुद्दीन, अनीस अहमद, सहित तमाम लोग शामिल रहे।





