गोरखपुर में बनने वाला गोरखा संग्रहालय अयोध्या के डोगरा रेजिमेंट और वाराणसी के गोरखा ट्रेनिंग सेंटर संग्रहालय से प्रेरणा लेगा। यह संग्रहालय आम लोगों के लिए खुला रहेगा। इसमें गोरखा रेजिमेंट के इतिहास और शौर्य गाथाओं को दर्शाया जाएगा। संग्रहालय में लाइट एंड साउंड शो का भी आयोजन किया जाएगा। डीपीआर को अंतिम रूप देने से पहले लखनऊ के गोरखा रेजिमेंट संग्रहालय को देखने की भी विभाग की योजना है।
शासन से स्वीकृति मिलने और निर्माण के लिए धन की पहली किस्त उपलब्ध हो जाने के बाद संस्कृति विभाग गोरखा संग्रहालय के डीपीआर को और समृद्ध करने में जुट गया है। संग्रहालय का स्वरूप तय करने के लिए उन सैनिक संग्रहालयों का दौरा करने जा रहा है, जो पहले से उपलब्ध हैं।
इसे लेकर अयोध्या के डोगरा रेजिमेंट व वाराणसी के गोरखा ट्रेनिंग सेंटर संग्रहालय उनकी प्राथमिकता में है। डीपीआर को अंतिम रूप देने से पहले लखनऊ के गोरखा रेजिमेंट संग्रहालय को देखने की भी विभाग की योजना है।
शासन से स्वीकृत संग्रहालय के डीपीआर पर संस्कृति विभाग वृहद रूप से कार्य करने जा रहा है। इसके पीछे उसकी मंशा ऐसा संग्रहालय बनाने की है, जो सेना के नियम और मानक पर तो हो ही, साथ ही दर्शकों में रोमांच पैदा करने वाला भी हो। इसके लिए संस्कृति विभाग के अधिकारी अयोध्या में स्थापित डोगरा रेजिमेंट का संग्रहालय देखने जा रहे हैं।
इसी क्रम में अधिकारी वाराणसी में स्थापित 39 गोरखा रेजिमेंट ट्रेनिंग सेंटर भी जाएंगे क्योंकि वहां भी एक छोटा संग्रहालय है। नए डीपीआर को अंतिम रूप देने से पहले अधिकारी लखनऊ स्थित गोरखा रेजिमेंट के संग्रहालय भी जाएंगे। संस्कृति विभाग के अनुसार इस बीच गोरखा रेजिमेंट द्वारा संग्रहालय बनाने के लिए परिसर में जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित कर दी जाएगी।
जमीन मिलने के बाद निर्धारित कार्यदायी संस्था सीएंडडीएस अपना कार्य शुरू कर देगी। प्राथमिक रूप से तैयार डीपीआर के अनुसार संग्रहालय के साथ उसी दायरे में पहले से बने स्मारक को आकर्षक स्वरूप दिया जाएगा। साथ ही गोरखा रेजिमेंट की शौर्यगाथा दर्शकों को बताने व दिखाने के लिए लाइट एंड साउंड शो का इंतजाम भी किया जाएगा।
“गोरखा संग्रहालय बनाने के लिए हम उत्साहित है क्योंकि यह संग्रहालय अन्य संग्रहालयों से अलग होगा। संग्रहालय समृद्धतम बने, इसके लिए हमने अयोध्या के डोगरा रेजिमेंट संग्रहालय, वाराणसी व लखनऊ के गोरखा रेजिमेंट संग्रहालय को देखने की योजना बनाई है। उन्हें देखने के लिए गोरखपुर में बनने वाले गोरखा रेजिमेंट संग्रहालय के डीपीआर को अंतिम रूप दिया जाएगा। – डा. यशवंत सिंह राठौर, उप निदेशक, राजकीय बौद्ध संग्रहालय व संस्कृति विभाग, गोरखपुर
आम आदमी के लिए खुलने वाला पहला संग्रहालय
संस्कृति विभाग के अनुसार गोरखा रेजिमेंट की सात शाखाएं हैं और हर शाखा में किसी न किसी रूप में संग्रहालय है। पर उसमें रखे प्रदर्श के अवलोकन की अनुमति केवल रेजिमेंट के अधिकारियों और सैनिकों को ही। गोरखपुर के गोरखा रेजिमेंट परिसर मेें बनने वाला संग्रहालय, ऐसा पहला संग्रहालय होगा, जो आम आदमी के लिए भी खुला रहेगा।
इसे लेकर संस्कृति विभाग उत्साहित है और संग्रहालय को वह स्वरूप देने की तैयारी कर रहा, जिसमें रखे प्रदर्श को देखते हुए लोगों में रोमांच पैदा हो जाए। प्रदर्श की उपलब्धता सुनिश्चित करना रेजिमेंट की जिम्मेदारी होगी क्योंकि संग्रहालय बनाने का प्रस्ताव रेजिमेंट के अधिकारियों की ओर से आया था।
उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर संग्रहालय बनाने का अनुरोध किया था। जिस क्रम में यह प्रक्रिया आगे बढ़ी है। 45 करोड़ रुपये शासन से स्वीकृत होने के बाद पहले किस्त के रूप में 15 करोड़ रुपये जारी भी हो चुके हैं।