आयतुल्लाह ख़ामेनेई की शहादत ने हमे एक बार फिर कर्बला की याद दिला दिया :मौलाना शमशाद
गोरखपुर । ईरान के सुप्रीम लीडर रहबर ए मोअज्जम और विश्व शिया समुदाय के नायब ए इमाम आयतुल्लाह सैय्यद अली ख़ामेनेई की शहादत रविवार को इमामबाड़ा अशरफुननिशा खानम, शेखपुर निकट गीता प्रेस पोस्ट ऑफिस शिया जामा मस्जिद परिसर में एक शोक सभा का आयोजन किया गया।
अमेरिका और इजरायल की कायराना कार्यवाही पर मुस्लिम समुदाय के शिया व सुन्नी मुसलमान व इंसानियत वो अमन पसंद लोगों ने शिरकत किया।इस मौके पर आयोजित शोक सभा में शिया जामा मस्जिद के पेश नमाज मौलाना शमशाद अब्बास साहब ने कहा कि नायब ए इमाम आयतुल्लाह सैय्यद अली ख़ामेनेई की शहादत से पूरी आलम ए इंसानियतअश्क बार है।
ऐसा नही है कि उन्हें अंजाम मालूम नही था बल्कि वो तो उस रवायत को दोहरा रहे थे जिसमें ज़ालिम के आगे घुटने टेकना नहीं सिखाया जाता। ज़ुल्म से लड़ने वालों की तादाद हमेशा मुख्तसर सी रही है। हमारी तारीख़ में मज़लूम हमेशा 72 की तादाद में तो वहीं ज़ालिम की तादाद हर दौर में हमेशा लाखों की रही है।
मौलान ने कहा कि इस शहादत ने हमे एक बार फिर कर्बला की याद दिला दिया। तब इमाम हुसैन (अ.स.) ने अपने दौर की सुपर पावर “यज़ीद के पापी साम्राज्य” के आगे सर झुकाने के बजाए आपना सर देकर यज़ीद की तलब ए बैयत को हमेशा हमेशा के लिए खत्म करते हुए बुराई के मुंह पर जो तमाचा जड़ा था उसकी गूंज से आज के दौर के यज़ीदियों में तिलमिलाहट और बेचैनी कायम है।
इमाम ख़ामेनेई ने अपनी शहादत से आज के दौर के यज़ीदियों को एक बार फिर बता दिया है कि शहादत हुसैनियों की मीरास है। जब हमने अल्लाह के आगे सर झुका दिया तो फिर हमारे लिए उसके सिवा कोई दूसरा सुपर पावर नहीं।
इमाम ख़ामेनेई की शहादत ने बता दिया कि यज़ीद भले ही अपनी जीत के गुमान में जश्न में डूब जाए लेकिन वह हर दौर में जलील होगा और बाद ए शहादत हुसैनी परचम हर दौर में बुलन्द और बुलन्द होता रहेगा।
इमाम ख़ामेनेई की शहादत को लाखों सलाम, जिन्होंने आज के दौर के यज़ीद की बैयत को ठुकराते हुए जाम ए शहादत क़ुबूल किया। इस मौके पर मौजूद लोगों ने अमेरिका और इजरायल मुर्दाबाद के नारे लगाए।





