Saturday, February 21, 2026
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अरे वाह, पूर्व प्रधान धड़ल्ले से कर रहा फर्जी अस्पताल का संचालन

अवधनामा संवाददाता
जनसूचना में हुआ खुलासा, विभागीय शिथिलता के चलते पनप रहा गोरखधंधा

ललितपुर। कहने और सुनने में बड़ा अजीब लग रहा होगा, लेकिन यही सत्य है। गांव में पहले प्रधानी संभाली और अब किसी गली-कूचे में नहीं, बल्कि खुलेआम मुख्य मार्ग पर दो मंजिला मकान में फर्जी अस्पताल का संचालन किया जा रहा है। ऐसा भी नहीं है कि विभागीय अधिकारियों को इसकी भनक न हो, जानकारी तो है लेकिन नेतागिरी के चलते कार्यवाही शून्य की अवस्था में पड़ी रहती है। पूरे मामले का खुलासा विगत दिनों स्वास्थ्य विभाग से मांगी गयी सूचना के जरिए हुआ है। अब देखना लाजिमी होगा कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग धड़ल्ले से संचालित हो रहे फर्जी अस्पताल पर क्या कार्यवाही अमल में लाता है।
गौरतलब है कि वैश्विक महामारी कोरोना संकट काल में इस बात से इंकार भी नहीं किया जा सकता है कि सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ ग्रामीण अंचलों व गली-कूचों में खुली डिस्पेंसरी और क्लीनिकों ने काफी हद तक लोगों को स्वास्थ्य लाभ पहुंचाया है। लेकिन उक्त डिस्पेंसरीज और क्लीनिंग के संचालक कहीं न कहीं एक डिप्लोमा, डिग्री या फिर अनुभव के आधार पर उपचार करते देखे गये। जिसे तत्समय मानवीय तथ्यों को ध्यान में रखते हुये कार्यवाही की जद में भी नहीं लाया गया। लेकिन संकट के काले बादल छटने के बाद अब गांव में प्रधानी संभालने वाले अप्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा फर्जी तरीके से क्लीनिक का संचालन किया जा रहा है।
बताते चलें कि ग्राम सिलगन में राजघाट रोड पर सड़क किनारे एक दो मंजिला मकान स्थित है, जिसमें फर्जी तरीके से अस्पताल संचालन की जानकारी ग्रामीणों द्वारा समय-समय पर दी जाती रही है। मामले की जानकारी करने पर पता चला कि बिना किसी वैद्य लाइसेंस और डिग्री के गांव के पूर्व प्रधान द्वारा फर्जी तरीके से अवैध क्लीनिक का संचालन किया जा रहा है। क्लीनिक के बाहर बने चबूतरे पर बैठे गांव व अन्य गांव से आये लोगों ने बताया कि गांव के पूर्व प्रधान अपने घर में अस्पताल का संचालन करते हैं। उनके द्वारा मलेरिया, टायफाइड, सर्दी-जुकाम के साथ अन्य रोगों का उपचार कराने के लिए लोग आते हैं, जिनका उपचार उनके द्वारा किया जाता है और दवायें भी दी जाती हैं। गांव के लोगों ने यह भी बताया कि वह बिना किसी डिप्लोमा या डिग्री के ही लोगों का उपचार करते हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि यदि कोई भी व्यक्ति इस प्रकार से फर्जी अस्पताल का संचालन करते हुये लोगों के जीवन से खिलबाड़ कैसे कर सकता है ?
जनसूचना में हुआ खुलासा फर्जी है अस्पताल
मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय से जब सिलगन से राजघाट जाने वाले मुख्य मार्ग पर फर्जी अस्पताल संचालन की लिखित रूप से जानकारी सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत मांगी गयी तो विभाग ने जनसूचना पत्र संख्या 5440 दिनांक 11 जनवरी 23 में स्पष्ट उल्लेख किया है कि पूर्व प्रधान हरीराम द्वारा चलायी जा रही क्लीनिक कोई अभिलेख स्वास्थ्य विभाग में नहीं है और उक्त क्लीनिक का पंजीकरण सीएमओ कार्यालय से नहीं कराया गया है।

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