कांग्रेस को लेकर गठबंधन में पेंच फंसा
माया नहीं चाहती पंजा साथ आये
कांग्रेस चाहती है ज्यादा सीटें
सैयद निजाम अली

लखनऊ। अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को लेकर विपक्ष के महागठबंधन में पेज फंसा है।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जो इस महागठबंधन के मुख्य सूत्रधार है। वह चाह रहे है कि कांग्रेस भी इस गठबंधन में शामिल हो लेकिन बसपा प्रमुख मायावती व सपा के पूर्व अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव नहीं चाहते कि कांग्रेस को इस गठबंधन में शामिल किया जाये।
इस महागठबंधन में समाजवादी पार्टी, बसपा, राष्ट्रीय लोकदल, पीस पार्टी के अलावा लाल बिग्रेड े के भी शामिल होने की संभावना है लेकिन कर्नाटक में कुमारस्वामी के शपथग्रहण समारोह में कंाग्रेस की पूर्व अध्यक्ष व यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गांधी जिस तरह मायावती से मिली उससे तो लग रहा था कि कांग्रेस को लेकर मायावती नकारात्मक सोच नहीं रखती है। लेकिन जिस तरह उन्होंने उत्तर प्रदेश की ८० लोकसभा सीटों में से ४० सीटें की मांग रख दी है।
उससे कंाग्रेस का महागठबंधन में शामिल होने मुश्किल लग रहा है।
मायावती का मानना है कि कंाग्रेस को भाजपा के ही उच्च वर्ग के वोट मिलेंगे। लेकिन अगर कांग्रेस महागठबंधन में शामिल नहीं होती
तो यह वोट महागंठबंधन के खाते में आयेगा। मुलायम सिंह यादव कांग्रेस को रायबरेली व अमेठी की ही सीट देने के पक्ष हैं। जहां तक कांग्रेस का सवाल है तो वह दो सीटों पर कभी नही राजी होगी। कांग्रेस कम से कम दस से १५ सीटें चाहती है। वैसे अखिलेश यादव का मानना है कि सीटों के बंटवारे को लेकर कोई पेंच नहीं फसेंगा।
इधर भाजपा व आरएसएस ने चुनाव के लिए अभी से तैयारियां शुरु कर दी है। गुरुवार को प्रधानमंत्री ने संतकबीरनगर के मगहर से चुनाव का शंखनाद कर दिया। आरएसएस ने चुनाव के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को कई मंत्र भी दिये इसमें दलित व पिछड़े वर्ग को लेकर साथ चलने का मंत्र भी है। भाजपा नहीं चाहती कि विपक्ष के पास दलित व मुस्लिम एकता हो पाये क्योंकि इस एकता के बल पर ही विपक्ष ने गोरखपुर, फुलपूर और कैराना के लोकसभा उप चुनाव जीतें है।
समाजवादी पार्टी व बहुजन समाज पार्टी के बीच एकता होने से अब एक बात साफ है कि मुस्लिम वोटों का बिखराव नहीं हो पायेगा।
भाजपा मुुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक के मुद्दे को लेकर अपने पाले में करने के पक्ष में है लेकिन अभी भी मुस्लिम महिलाओं का एक वर्ग कट्टरपंथी वर्ग का और वह अपने पति के खिलाफ वोट नहीं देने के पक्ष में है। आरएसएस व भाजपा ने एमएलसी बुक्कल नवाब के सहारे
राष्ट्रीय शिया समाज का गठन करवाया हैै लेकिन बुक्कल नवाब जनमानस केे नेता नहंीं है। और न ही वह शिया समाज को अपने पक्ष में वोट डलवा सकेंगे।विपक्ष के सूत्रों के मुताबिक अखिलेश यादव व मायावती भाजपा की सारी चालों के बाद ही अपने उम्मीदवारों की घोषणा करेंगे।





