Sunday, April 26, 2026
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HomeMarqueeप्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन मानव जीवन के लिए खतरा: विज्ञानानंद

प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन मानव जीवन के लिए खतरा: विज्ञानानंद

अवधनामा संवाददाता

सहारनपुर। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान ने जिला कारागार मंे आयोजित तीन दिवसीय जाग्रति कार्यक्रम के अंतर्गत स्वामी विज्ञानान्द ने बंदियों को पर्यावरण की महानता समझाते हुए कहा कि मानव द्वारा आधुनिकतावाद और विकासवाद की अंधी दौड़ में प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन हो रहा है। जिसमें वनस्पति जगत पतन के कागार पर है। प्राकृतिक संसाधनों में सम्पूर्ण जीव जगत की मूलभूत आवश्यकता जल और वायु है।
जिला कारागार में आयोजित जाग्रति कार्यक्रम में स्वामी विज्ञानन्द ने जल है तो कल है कि अवधारणा पर बल देते हुए बताया कि भोजन के बिना मनुष्य कुछ दिनों तक जीवित रह सकता है, परन्तु जल और वायु के बिना एक दिन भी जीवनयापन करना मुश्किल है। यदि प्रति व्यक्ति के हिसाब से शुद्ध पेयजल की बात की जाए, तो सर्वेक्षण बताते हैं कि वृक्ष कटाव और ग्लोबल वार्मिंग की समस्या के कारण भारत में पिछले 10 वर्षों में भूमिगत जल स्तर इतना निम्न स्तर पर जा चुका है कि 2050 तक सम्पूर्ण भारत मरु भूमि बन जाएगा और तीसरा विश्व युद्ध जल के लिए होने की सम्भावना है। चिंता का विषय है कि मनुष्य अपनी भावी पीढ़ी को क्या देकर जायेगा। चूंकि स्वास्थ्य चिकित्सा में भी जल चिकित्सा को सर्वप्रथम स्थान प्राप्त है। भूमिगत जल संसाधनों के विकास पर बल देते हुए स्वामी जी ने उपस्थित जन समूह को अपने भारत की पवित्र नदियों की स्वच्छता व जल संरक्षण की प्रेरणा देते हुए अधिक से अधिक पौधारोपण करने की प्रेरणा दी। इसी तथ्य की शिलापट पर आज स्वामी जी ने संस्थान की ओर से कारागार अधीक्षिका अमिता दुबे और डिप्टी जेलर अभय शुक्ला को अत्यधिक ऑक्सीजन प्रदायक पौधे भेंट किये। साथ ही कारागार परिसर में स्वामी जी ने डिप्टी जेलर व कैदी बन्धुओं के साथ मिलकर पौधे भी लगाए। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रकृति प्रेमियों ने जल संसाधनों के संरक्षण और संवर्धन, पौधरोपण करने, सम्पूर्ण वनस्पति जगत के विकास करने व स्वच्छ भारत का निर्माण करने का सामूहिक संकल्प भी लिया।

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