समर्पित, निष्ठावान कर्मयोगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी एवं स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज की भावपूर्ण भेंट वार्ता प्रयाग कुम्भ को स्वच्छ और हरित बनाने पर हुई चर्चा
लखनऊ,। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष, गंगा एक्शन परिवार के प्रणेता और ग्लोबल इण्टरफेथ वाश एलायंस के संस्थापक स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज एवं उत्तरप्रदेश के समर्पित, निष्ठावान कर्मयोगी माननीय मुख्यंमत्री योगी आदित्यनाथ जी की भावपूर्ण सकारात्मक भेंटवार्ता सम्पन्न हुई।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि उत्तरप्रदेश की जनता का सौभाग्य है कि एक निष्ठावान, कर्मयोगी मुख्यमंत्री का सान्निध्य प्राप्त है। उनके विचार, कार्य करने की शैली और राज्य के प्रति उनका सर्मपण अद्भुत है यह देखकर मन गद्-गद् हो उठा। स्वामी जी ने कहा, हमारा प्रयास है कि वर्ष 2019 का प्रयाग कुम्भ पूरे विश्व में स्वच्छ और हरित कुम्भ के रूप में जाना जाये। माननीय योगी जी का गंगा और अन्य नदियों में बढ़ते प्रदूषण और गिरते गंदे नालों को लेकर दृढ़ संकल्प भीष्मप्रतिज्ञा जैसा संकल्प है जिसे देखकर अपार प्रसन्न हुई। ऐसा लगा कि कोई है जिनके मन में सचमुच गंगा और अन्य नदियों के प्रति पीड़ा है और इस पीड़ा को केवल पीड़ा नहीं बल्कि प्रेरणा के रूप में लें तथा पीड़ा कैसे पे्रेरणा बने सबके लिये, समाधान बने सब के लिये इसका भी दृढ़ इरादा माननीय मंत्री जी रखते है।
इस अवसर पर अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव के विषय में भी विस्तृत चर्चा हुई। स्वामी जी महाराज ने कहा कि अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव 29 वर्ष पूर्व उत्तरप्रदेश से शुरू हुआ था तत्पश्चात परमार्थ निकेतन और उत्तराखण्ड सरकार ने मिलकर इस महोत्सव को आगे बढ़ाया फिर उत्तराखण्ड बनने के बाद उत्तराखण्ड सरकार के साथ यह कार्यक्रम बड़ी तेजी और विशालता के साथ आगे बढ़ा। स्वामी जी ने कहा कि अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव की 30 वीं वर्षगाठ पर विश्व के लगभग 121 देशों के योग जिज्ञायुओं का आह्वान किया है हम योग महोत्सव की 30 वीं वर्षगांठ को प्रयाग में महाकुम्भ के अवसर पर मना कर इस कुम्भ को यादगार और ऐतिहासिक बना सकते है।

परमार्थ निकेतन गंगा तट पर 1997 में आरम्भ हुई विश्व विख्यात दिव्य गंगा आरती का आरम्भ हुआ। सन 1998 में गंगोत्री और 1999 में बनारस और 2000 व 2001 में इलाहाबाद कुम्भमेला के अवसर पर प्रयाग के तट पर कंाचीपुरम के जगद्गुरू पूज्य शंकराचार्य और बौद्ध धर्म के शिखर परम पावन दलाई लामा जी उपस्थित थे। दोनों शिखरों ने जब आरती हाथ में उठायी वह अद्भुत दृश्य था पुनः उस दृश्य को साकार करने के लिये भी स्वामी जी महाराज ने योगी आदित्यनाथ जी से मुलाकत कर सकारात्मक चर्चा की। साथ ही वृक्षारोपण, नदियों में गिरते नालों, प्रदूषण, पालिथिन पर प्रतिबंध एवं अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों को लेकर सकारात्मक चर्चा हुई। योगी जी की सकारात्मकता, स्वीकृति एवं अन्य संकल्पों को देखकर मन सचमुच गौरवान्वित हो उठा।
कुम्भ के अवसर पर होने वाले सर्वधर्म स्वच्छता, समरसता और सद्भाव के कार्यक्रम को लेकर चर्चा की। कुम्भ के अवसर पर पूरे विश्व के लगभग 15 करोड़ लोग कुम्भ में सहभाग कर दर्शन करेगे तब हम उन तक सर्वधर्म स्वच्छता, समरसता एवं सद्भाव तथा स्वच्छ, स्वस्थ्य एवं समृद्ध भारत का संदेश पहुंचा सके इस पर भी चर्चा हुई।
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