Sunday, February 15, 2026
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मेटा ने फिक्की के एक्सआर ओपन सोर्स फेलोशिप प्रोग्राम को समर्थन दिया, एनईजीडी बना टेक्निकल पार्टनर

 

अपने एक्सआर प्रोग्राम्स और रिसर्च फंड के तहत, मेटा एक्सआरओएस फेलोशिप प्रोग्राम का समर्थन करेगा ताकि 100 भारतीय डेवलपर्स को मेटावर्स के लिए ओपन सोर्स प्रोजेक्ट्स पर काम करने में सक्षम बनाया जा सके और एक्सआर तकनीकों में भारत के योगदान को गति दी जा सके।
एक्सआरओएस फेलोशिप प्रोग्राम नवाचार को बढ़ावा देने के लिए मेटावर्स के लिए एक खुले पारितंत्र को सक्षम करने में सहायता करेगा।

नई दिल्ली: एक्सआर तकनीकों के विकास में भारत के योगदान में तेजी लाने की अपनी प्रतिबद्धता के अनुसार, मेटा एक्सआर ओपन सोर्स (एक्सआरओएस) फेलोशिप प्रोग्राम के लिए 1 मिलियन डॉलर के फंड के साथ फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) को समर्थन दे रहा है। फिक्की द्वारा संचालित एक्सआरओएस एक्सआर (विस्तारित वास्तविकता) तकनीक पर काम कर रहे 100 भारतीय डेवलपर्स को फेलोशिप प्रदान करके समर्थन देगा जिसमें स्‍कॉलरशिप और प्रशिक्षण शामिल है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की पहल, राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीजन, इस कार्यक्रम का टेक्निकल पार्टनर होगा।

यह प्रोग्राम डेवलपर्स को एक्सआर तकनीक से संबंधित ओपन सोर्स प्रोजेक्ट्स में योगदान करने में मदद करेगा और भारत के विशिष्ट समाधानों की नींव रखेगा जोकि भारतीय भाषाओं के लिए किफायती, उपयुक्त और स्थानीय हैं। एक्सआरओएस प्रोग्राम मेटा के ग्लोबल एक्सआर प्रोग्राम्स एंड रिसर्च फंड का हिस्सा है, जिसके तहत कंपनी ने इस साल की शुरुआत में मीटी स्टार्टअप हब के साथ एक्सआर स्टार्टअप प्रोग्राम के लिए 2 मिलियन डॉलर के फंड की घोषणा की। एक्सआरओएस का लक्ष्य डेवलपर्स को डिजिटल सार्वजनिक सामान बनाने और एक्सआर तकनीकों के क्षेत्र में संभावित रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए आवश्यक संसाधन प्रदान करना है।

इस कार्यक्रम पर अपने विचार साझा करते हुए, निक क्लेग, प्रेसिडेंट, ग्लोबल अफेयर्स, मेटा ने कहा, “मेटावर्स अकेले एक कंपनी द्वारा नहीं बनाया जाएगा। एक्सआर ओपन सोर्स जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से, हम इन रोमांचक तकनीकों पर काम कर रहे भारतीय डेवलपर्स का समर्थन करेंगे। उनकी प्रतिभा, जानकारी और प्रयास के साथ, हम यह सुनिश्चित करने की उम्मीद करते हैं कि अगली पीढ़ी की इंटरनेट तकनीकों को एक खुले, सहयोगात्मक और सुलभ तरीके से बनाया जाए।”

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