पानी की किल्लत से जूझ रहे शहर के कई क्षेत्र
शहर की जनसंख्या के हिसाब से पूरी तरह जलापूर्ति नही कर रहा जलकल विभाग।
पुरानी और लीकेज पाइपो से प्रतिदिन बर्बाद हो रहा सप्लाई का 15 प्रतिशत जल
शहर के सभी वार्डो में खराब पडे हैण्डपंर, पैसा देकर लोग पानी खरीदने को मजबूर
कानपुर महानगर। गर्मियों में शहर में होने वाली किल्लत के सामने जलकल के बडे-बडे दावें खोखले नजर आने लगते है। यह समस्या हर वर्ष गर्मियों में शहरियों के सामने खडी हो जाती है। जलकल विभाग शहरवासियों को पूरी तरह पानी तक मुहैया नही करा पा रहा है। एक तो पहले से ही शहरवासी खुदाई और पानी की टेस्टिंग के दौरान होने वाली लीकेंज व पाइप लाइन फटने से परेशान है उसपर भीषण गर्मी में शहर के कई क्षेत्रों में जलापूर्ति नही हो पा रही है। एक आंकडे के अनुसार पूरे कानपुर नगर को प्रतिदिन 51 करोड लीटर पानी की आवश्यकता है जबकि जलकल विभाग महज 42 करोड लीटर ही पानी मुहैया करा पा रहा है। ऐसे में पानी की किल्लत वाजिब है। लोग पानी के लिए परेशान है। नलों में समय से पानी नही आता है, आता है तो लो प्रेशर के कारण तथा गंदा पानी होने के कारण लोग उसका उपयोग नही कर पा रहे है। ऐसे में आने वाले दिनो में पानी की किल्लत से शहरियों को निजाद नही मिलती दिखाई दे रही है।

एक तरफ जलकल विभाग द्वारा शहर को पूरी तरह से जलापूर्ति नही की जा पा रही है तो दूसरी ओर नगर निगम की लापरवाही भी सामने आ रही है। शहर का कोई वार्ड ऐसा नही है जहां हैण्डपंप खराब न हो। दर्जनो हैंडपंप बेकार होकर शोपीस बने खडे है। गर्मियों में पानी की मांग बढ जाती है। विभाग दांवा तो करते है लेकिन उन सब पर पानी ही फिर जाता है। बीते दिनो ही पानी की किल्लत को लेकर शहर में कई स्थानो पर लोगो ने प्रदर्शन किया है, कई क्षेत्रों में पानी को लेकर त्राहि-त्राहि मची हुई है। दक्षिण क्षेत्र में कई इलाके पेयजल समस्या से जूझ रहे है। कहीं कहीं तो पानी की किल्लत के कारण लोग पैसा देकर पानी खरीदने को मजबूर है वहीं गंदा और बदबूदार पानी भी लोगो के लिए समस्या बना है। भले ही तत्कालीन नगर आयुक्त कह गये हो कि शहर को साफ और पूरी तरह पानी अक्टूबर से मिलने लगेगा लेकिन वर्तमान में लोग पानी की किल्लत से जूझ रहे है। जलकल विभाग के सभी संसाधन जनता की परेशानियों के सामने बौने नजर आ रहें है। देखा जाये तो जलसंस्थान शहर हो महज 30 लाख की जनसंख्या के लिए पानी देता है लेकिन शहर की जनसंख्या 45 लाख से भी ज्यादा है। श्ज्ञहर में भैरों घाट पपिंग स्टेशन से प्रतिदिन 20 करोड लीटर की जलापूर्ति होती है वहीं गुजैनी वाटर वक्र्स की क्षमता तो 2.8 करोड है लेकिन यहा से महज 1.5 करोड लीटर ही पानी की जलापूर्ति हो पा रही है। वहीं लोअर गंगा कैनाल से 6 करोड लीटर पानी लिया जा रहा है। ऐसे में बडी समस्या यह भी है कि शहर में वर्षो से पडी पाइप लाइने जो जगह-जगह लीक हो चुकी है उनसे लाखो लीटर पानी बर्बाद चला जाता है मतलब लगभग 15 प्रतिशत पानी वेस्ट होता है। अभी जून की तपिश बांकी है और गंगा का भी जल स्तर दिन प्रतिदिन नीचे जा रहा है ऐसे में आने वाले समय में किस प्रकार से जलकल विभाग शहरियों की प्यास बुझायेगा यह एक बडा सवाल है।

सर्वोत्तम तिवारी की रिपोर्ट
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