Thursday, March 19, 2026
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कानपुर के इस मुन्नाभाई की अनोखी मुहिम, प्रैक्टिस के लिए डॉक्टरों को मुहैया करा रहे शव

कानपुर के इस मुन्नाभाई की अनोखी मुहिम, प्रैक्टिस के लिए डॉक्टरों को मुहैया करा रहे शव

144 देहदान मेडिकल कॉलेजों को दे चुके, राज्यपाल ने खुश होकर पुरूस्कार दिया

कानपुर महानगर । 15 साल पहले एक युवक भैरवघाट स्थित गंगा में डुबकी लगाने पहुंचा, तभी गंगा की लहरों में इंसानों के कई शव तैरते मिले। यह देख युवक के आंख से आंसू छलक पड़े और वहीं पर प्रण किया कि इंसान की मौत के बाद उसके शव का अपने पैसे से दाह संस्कार करूंगा। इसी के बाद उन्होंने शव दाहगृह के बाहर दधीची नाम का बैंक खोला, जिसमें दाह संस्कार के बाद बची अस्थियों को रखने के साथ ही उन्हें जमीन के नीचे विर्सजित किया जाता है। दधीची संस्था के संस्थापक एक और अनूठा कार्य को बीढ़ा उठाया। वे मरणोपरान्त अपना मृत शरीर चिकित्सकीय शोध के लिए समर्पित कर दिया। साथ ही मेडिकल कॉलेज स्टूडेंट्स के लिए अभी तक 144 देहदान दे चुके हैं। इनके इस कार्य से प्रभावित होकर 2500 लोगों से मरणोपरान्त अपना देहदान करने का संकल्प पत्र भरा है। कानपुर के साथ ही आसपास के जिलों के लोग मनोज को सेंगर को मुन्नाभाई एमएमबीबीएस के नाम से पुकारने लगे हैं। मनोज कहते हैं कि मेडिकल कॉलेजों में स्टूडेंट्स को रिसर्च के लिए शव नहीं मिल रहे। इसी के चलते कई बीमारियों के खात्में के लिए मेडिसिन नहीं उपलब्ध हो पाती। इसी समस्या से डॉक्टर की पढ़ाई करने वाले छात्रों को छुटकारा दिलाने के लिए हम देहदान दधीचि नाम की संस्था का आगाज 2003 में किया था, जिसमें हमें कुछ हद तक कामयाबी भी मिली है। मनोज के कार्य से प्रभावित होकर यूपी के राज्यपाल रामनाईक ने पुरूस्कार देकर कार्य की सराहना की है।
कैप्टन मानवती आर्या से मिली प्रेरणा
मेडिकल साईन्स की शिक्षा ले रहे हजारों डाक्टरों के सामने इन्सानी मृत शरीरो का न मिलना हमेशा से एक बड़ी समस्या रही है । हिन्दी फिल्म ‘‘ मुन्ना भाई एमबीबीएस ’’ में तो उनका डीन मुन्ना से यहॉ तक कह देता है कि डाक्टरी पढ़नी है तो अपने लिये एक मृत शरीर का बन्दोबस्त खुद करें । असली जिन्दगी की सच्चाई भी यही है । आज मेडिकल कालेजों में चिकित्सकीय शोध के लिये मृत जिस्म नहीं मिलते । ऐसे ही एक मेडिकल कालेज में जब जिन्दा इन्न्सान पर शोध होता देखकर समाजसेवी मनोज सेंगर का दिल दहल गया और फिर यहीं से उन्होने देहदान अभियान की नींव रखी। मनोज सेंगर ने 15 नवंबर 2003 को अपना और अपने परिवार के सभी सात सदस्यों का देहदान करने का संकल्प लिया था। मनोज ने बताया कि उन्हें इस कार्य की प्रेरणा आजाद हिन्द फौज की कैप्टन मानवती आर्या से मिली। उन्होंने मुझे बताया कि अपने पति कृष्ण चन्द्र आर्या के निधन के बाद उनका मृत शरीर कानपुर मेडिकल कालेज को सौपा था। इसी के बाद मैं इस मिशन में उतर गया और लोगों को इसके लिए जागरूक करने लगा।
कालेजों में मृत देहों की भारी कमी
मनोज सेंगर कहते हैं कि मानव शरीर की आन्तरिक संरचना के अध्ययन के लिये मेडिकल कालेजों में मृत देहों की भारी कमी है। हालात यह है कि जहॉ दस छात्रों के बीच एक शरीर होना चाहिये , वहॉ एक मृत देह पर दो सौ छात्र अध्ययन करते हैं । मानव शरीर की रचना का विस्तृत अध्ययन ही छात्रों को कुशल चिकित्सक बनाता है । इसके अलावा घातक बीमारियों के कारणों का अध्ययन करने के लिये भी मृत देह की आवश्कता होती है। मनोज कहते हैं कि इस अभियान को चलाना आसान नहीं है। कहते हैं, वे उन परम्परावादियों के निशाने पर रहे जो इस मान्यता पर यकीन करते हैं कि अगर मरने वाले का धार्मिक रीति रिवाज के साथ अन्तिम संस्कार न किया जाय तो उसकी आत्मा भटकती रहती है। लेकिन मनोज के पास अपने तर्क हैं। वे कहते हैं कि पौराणिक मान्यताओं के आधार पर ही वे साबित कर सकते हैं कि देहदान करने वाले को ‘‘ मोक्ष ’’ मिलना निष्चित है।
दिवगंत देहदानियों के नाम से कराते हैं यज्ञ
गायत्री परिवार से जुड़े मनोज सेंगर देहदान लेकर देहदानी को भूल नहीं जाते हैं। बल्कि हर बरस उनकी आत्मा की शान्ति के लिये सनातन रीति रिवाजों से यज्ञ आयोजित करते हैं । इन यज्ञषालाओं में दिवगंत देहदानियों के लिये आहुति अर्पित की जाती है। मनोज देहदान करने वाले के घर वे खुद एम्बुलेन्स लेकर पहुॅचते है और सम्मान पूर्वक उसका मृत शरीर मेडिकल कालेज पहुॅचा कर आते हैं । मनोज सेंगर ने अब तक 144 लोगो के मृत शरीर को मेडिकल कालेज को दान करवाया है। कानपुर मेडिकल कालेज को अब तक 92 मृत शरीर सौप चुके है । किंग जार्ज मेडिकल कालेज लखनऊ को 22 मृत शरीर सौप चुके है। मोती लाल नेहरू मेडिकल कालेज ईलाहाबाद को 25 मृत शरीर सौप चुके है। अम्बेडकर नगर मेडिकल कालेज को 03 मृत शरीर सौप चुके है । आयुर्विज्ञान संस्थान सैफई को 01 मृत शरीर सौप चुके है। वर्धमान महावीर मेडिकल कालेज दिल्ली 01 मृत शरीर सौप चुके हैं। इसके आलावा मनोज सेंगर ने 925 लोगो को नेत्र ज्योति प्रदान करवाई है।

सर्वोत्तम तिवारी की रिपोर्ट 


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