लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 68,500 शिक्षक भर्ती का मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अभ्यर्थियों ने नियुक्ति की मांग को लेकर राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) कार्यालय का घेराव किया। प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि वे पिछले आठ वर्षों से नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिल पाया है। लंबे समय से चली आ रही इस समस्या को लेकर अभ्यर्थियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
आठ साल बाद भी नियुक्ति का इंतजार
68,500 शिक्षक भर्ती से जुड़े अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने के बाद भी उनका भविष्य अनिश्चित बना हुआ है। वर्षों से नियुक्ति की उम्मीद लगाए बैठे अभ्यर्थी अब अपनी मांगों को लेकर लगातार आवाज उठा रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि लंबे समय तक इंतजार करने के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका है। उनका कहना है कि शिक्षक भर्ती से जुड़ी प्रक्रिया में देरी के कारण उनके सामने आर्थिक और सामाजिक परेशानियां भी खड़ी हो गई हैं।
SCERT कार्यालय पर जुटे अभ्यर्थी
नियुक्ति की मांग को लेकर अभ्यर्थियों ने एससीईआरटी कार्यालय पहुंचकर अपना विरोध दर्ज कराया। कार्यालय का घेराव करते हुए उन्होंने सरकार और संबंधित अधिकारियों से मामले में जल्द हस्तक्षेप करने की मांग की।
अभ्यर्थियों का कहना है कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए और वर्षों से लंबित नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट निर्णय लिया जाना चाहिए। उनका मानना है कि लगातार इंतजार के कारण उनके धैर्य की सीमा अब समाप्त हो रही है।
सरकार से जल्द समाधान की मांग
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने नियुक्ति संबंधी विवाद का जल्द निपटारा करने की मांग उठाई। उनका कहना है कि आठ साल का लंबा इंतजार किसी भी अभ्यर्थी के लिए बेहद कठिन है। ऐसे में सरकार और संबंधित विभाग को उनकी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर करना चाहिए।
अभ्यर्थियों की मांग है कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़े सभी लंबित मामलों की समीक्षा कर नियुक्ति को लेकर ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि उन्हें लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितता से राहत मिल सके।
शिक्षक भर्ती का मामला फिर चर्चा में
68,500 शिक्षक भर्ती का मामला उत्तर प्रदेश में लंबे समय से विवाद और चर्चा का विषय रहा है। अभ्यर्थियों के प्रदर्शन ने एक बार फिर भर्ती प्रक्रिया, नियुक्ति में देरी और सरकारी रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे युवाओं की समस्याओं को सामने ला दिया है।
अब देखना होगा कि अभ्यर्थियों के इस प्रदर्शन के बाद संबंधित विभाग और सरकार की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल, आठ साल से नियुक्ति की आस लगाए बैठे अभ्यर्थियों की नजरें अपने भविष्य को लेकर होने वाले फैसले पर टिकी हैं।


