जी20 के मंच से भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने वैश्विक चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर भारत का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि दुनिया के सामने मौजूद गंभीर संकटों का समाधान केवल सैन्य ताकत के दम पर नहीं निकाला जा सकता। इसके लिए कूटनीति, संवाद और आपसी सहयोग को प्राथमिकता देना जरूरी है।
जयशंकर ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में देशों के बीच बातचीत और विश्वास कायम करना बेहद महत्वपूर्ण है। अंतरराष्ट्रीय विवादों को सुलझाने के लिए बातचीत के रास्ते खुले रखने होंगे। सैन्य शक्ति का इस्तेमाल समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं दे सकता।
आतंकवाद के मुद्दे पर भी भारत का कड़ा रुख
विदेश मंत्री ने आतंकवाद को वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के खिलाफ दुनिया के सभी देशों को एकजुट होकर कार्रवाई करनी चाहिए। आतंकवाद को किसी भी परिस्थिति में सही नहीं ठहराया जा सकता और न ही इसके खिलाफ लड़ाई में दोहरा रवैया अपनाया जाना चाहिए।
वैश्विक सहयोग और कूटनीति पर दिया जोर
जयशंकर के संदेश में यह भी स्पष्ट रहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सभी देशों की भागीदारी जरूरी है। वैश्विक संकटों का असर किसी एक देश तक सीमित नहीं रहता, इसलिए इनके समाधान के लिए साझा प्रयास करने होंगे।
भारत ने जी20 जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर संवाद, सहयोग, शांति और आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई की आवश्यकता को प्रमुखता से उठाया।
जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक अमेरिका के अटलांटा में हुई। इस दौरान जयशंकर ने समुद्री व्यापार और जहाजों पर हमलों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि समुद्री रास्तों से आवाजाही की स्वतंत्रता सुरक्षित रहनी चाहिए और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत नागरिक जहाजों तथा नाविकों पर हमले बंद होने चाहिए।
वैश्विक दक्षिण के देशों पर बढ़ रहा आर्थिक दबाव
जयशंकर ने कहा कि समुद्री मार्गों पर हमलों का सबसे अधिक असर वैश्विक दक्षिण के देशों पर पड़ रहा है। इससे ईंधन, खाद्य पदार्थों और उर्वरकों की उपलब्धता प्रभावित हो रही है और उनकी कीमतों में भी बढ़ोतरी का खतरा पैदा हो रहा है।
उन्होंने आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत बनाने और वैकल्पिक संपर्क मार्ग विकसित करने की जरूरत भी बताई।
आतंकवाद पर क्या बोले जयशंकर?
आतंकवाद के मुद्दे पर विदेश मंत्री ने कहा कि रणनीतिक और तात्कालिक राजनीतिक हितों के कारण आतंकवाद के खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि आतंकवाद एक बेहद जोखिम भरी गतिविधि है, जिसका खामियाजा इसे बढ़ावा देने वालों को भी भुगतना पड़ सकता है इस बैठक में अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो समेत जी20 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।


