नई दिल्ली। E20 पेट्रोल को लेकर देश में चल रही बहस के बीच केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बड़ा बयान दिया है। 27 अक्टूबर 2026 को उद्योग जगत के एक कार्यक्रम में बोलते हुए गडकरी ने दावा किया कि E20 ईंधन के खिलाफ सोशल मीडिया पर पैसे देकर अभियान चलाया गया था। उन्होंने कहा कि करीब तीन महीने पहले इस मुद्दे पर काफी शोर मचाया गया, लेकिन अब विरोध का माहौल कम हो गया है।
‘पैसे देकर चलाया गया अभियान’, गडकरी का दावा
नितिन गडकरी ने E20 पेट्रोल के विरोध को कथित तौर पर पेड कैंपेन बताते हुए कहा कि इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर उठाया गया था। उन्होंने इथेनॉल मिश्रित ईंधन का समर्थन करते हुए कहा कि इससे भारत को पेट्रोलियम आयात पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, पेड कैंपेन को लेकर गडकरी का यह दावा है। इसे साबित करने वाले स्वतंत्र प्रमाणों का विवरण संबंधित रिपोर्ट में नहीं दिया गया है।
क्या है E20 पेट्रोल और क्यों हुआ विवाद?
E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल और शेष पेट्रोल होता है। सरकार इस कार्यक्रम को कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और कृषि आधारित इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने की नीति के रूप में देखती है।
दूसरी ओर, कुछ वाहन चालकों ने माइलेज, ईंधन दक्षता और पुराने वाहनों की अनुकूलता को लेकर चिंताएं जताई हैं। खास तौर पर ऐसे वाहनों को लेकर सवाल उठे हैं, जिन्हें E20 ईंधन के अनुरूप डिजाइन नहीं किया गया था।
सरकार का E20 से आगे बढ़ने का फिलहाल इरादा नहीं
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी स्पष्ट किया है कि फिलहाल पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण को 20 प्रतिशत से अधिक बढ़ाने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने E20 को लेकर फैलने वाली भ्रामक जानकारियों पर भी चिंता जताई।
E100 ईंधन की दिशा में भी बढ़े कदम
E20 विवाद के बीच केंद्र सरकार ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन अधिसूचित किए हैं, जिससे E100 यानी लगभग शुद्ध इथेनॉल तक पर चलने वाले फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए रास्ता खुला है। हालांकि, ऐसे ईंधन का इस्तेमाल संबंधित वाहन की तकनीकी अनुकूलता पर निर्भर करेगा।
वाहन चालकों के सवाल अभी भी अहम
सरकार E20 कार्यक्रम को ऊर्जा सुरक्षा और आयात में कमी के लिए महत्वपूर्ण मानती है, लेकिन उपभोक्ताओं की चिंताओं को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वाहन के मॉडल, निर्माण वर्ष और निर्माता के निर्देशों के अनुसार ईंधन की अनुकूलता अलग हो सकती है। इसलिए वाहन मालिकों को अपनी गाड़ी की पुस्तिका या अधिकृत सर्विस सेंटर से जानकारी लेनी चाहिए।





