नई दिल्ली। भारत की अर्थव्यवस्था और सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की गणना को लेकर जारी चर्चा के बीच अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत की संशोधित जीडीपी कार्यप्रणाली का समर्थन किया है। गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को आईएमएफ ने इसे ‘स्वागत योग्य कदम’ बताते हुए कहा कि भारत ने जीडीपी की गणना में जो बदलाव किए हैं, वे अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रक्रियाओं और आईएमएफ के सांख्यिकी विभाग की सलाह के अनुरूप हैं।
आईएमएफ ने क्या कहा?
आईएमएफ के एशिया और प्रशांत विभाग के निदेशक कृष्णा श्रीनिवासन ने बैंकॉक में पत्रकारों से बातचीत के दौरान भारत की नई जीडीपी गणना पद्धति की सराहना की। उन्होंने कहा कि कार्यप्रणाली में किए गए संशोधन आईएमएफ की ओर से पहले दी गई सलाह के अनुरूप हैं।
उन्होंने सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के प्रयासों की भी प्रशंसा की। आईएमएफ के मुताबिक, नई पद्धति से आर्थिक गतिविधियों का आकलन बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
जीडीपी गणना में क्या बदला?
भारत ने जीडीपी के नए आंकड़ों के लिए आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर 2022-23 किया है। इसके साथ ही कीमतों में बदलाव को ध्यान में रखकर वास्तविक आर्थिक वृद्धि मापने की प्रक्रिया में भी संशोधन किए गए हैं।
नई व्यवस्था में वस्तुओं और सेवाओं से संबंधित अधिक कीमत सूचकांकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। विनिर्माण क्षेत्र में इनपुट और आउटपुट की कीमतों को अलग-अलग समायोजित करने की व्यवस्था भी अपनाई गई है। इसका उद्देश्य वास्तविक आर्थिक वृद्धि का अधिक सटीक आकलन करना है।
जीडीपी के आंकड़ों पर क्यों उठे थे सवाल?
भारत की जीडीपी वृद्धि के आंकड़ों को लेकर हाल के महीनों में आर्थिक विशेषज्ञों और राजनीतिक दलों के बीच बहस हुई थी। कुछ आलोचकों ने पुराने आंकड़ों और गणना पद्धति में बदलाव के प्रभाव पर सवाल उठाए थे।
विशेष रूप से जून तिमाही में दर्ज 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर को लेकर चर्चा हुई। आलोचकों ने आंकड़ों की तुलना और संशोधित आधार वर्ष के प्रभाव पर सवाल उठाए, जबकि सरकार की ओर से नई पद्धति को आर्थिक गतिविधियों का बेहतर आकलन करने वाला कदम बताया गया।
भारत की विकास दर को लेकर आईएमएफ का अनुमान
आईएमएफ ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया है। घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र की गतिविधियों को आर्थिक वृद्धि के प्रमुख सहायक कारकों में गिना गया है। हालांकि, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं।
आगे क्या होगा?
भारत की संशोधित जीडीपी कार्यप्रणाली को आईएमएफ का समर्थन मिलने से आर्थिक आंकड़ों की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर चर्चा को नया आधार मिला है। हालांकि, कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने के प्रयास जारी रहेंगे और इसके प्रभाव का आकलन आगे उपलब्ध होने वाले आंकड़ों तथा समीक्षा के आधार पर किया जाएगा।





