मेडिकल स्टोर से मनाली तक खुलीं सौरभ हत्याकांड की परतें
मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ के बहुचर्चित नीले ड्रम हत्याकांड में अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। मर्चेंट नेवी अधिकारी सौरभ राजपूत की हत्या के इस मामले में पुलिस की जांच, मेडिकल स्टोर से जुड़े साक्ष्य, मोबाइल की कॉल डिटेल और गवाहों के बयानों ने अहम भूमिका निभाई। करीब 19 महीने तक चले इस मामले में 22 गवाहों के बयान दर्ज किए गए और 126 सुनवाइयों के बाद अदालत ने दोनों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।
मेडिकल स्टोर से शुरू हुई जांच की अहम कड़ी
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, जांच के दौरान दवाओं की खरीद और उनके इस्तेमाल से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की गई। अदालत में मेडिकल स्टोर संचालक ने बताया कि एक युवती डॉक्टर के पर्चे पर दवाएं लेने आई थी। बाद में तस्वीर देखने पर उसने युवती की पहचान मुस्कान के रूप में की।
वहीं, संबंधित डॉक्टर ने अदालत में कहा कि उन्होंने मुस्कान को सामान्य दवाएं दी थीं और नशीली दवा नहीं लिखी थी। इन बयानों को मामले की जांच के दौरान सामने आए अन्य साक्ष्यों के साथ देखा गया।
चाकू खरीदने वाले गवाह का बयान भी अहम
मामले की सुनवाई के दौरान एक दुकानदार ने गवाही दी कि एक युवती फल और सब्जियां काटने के बहाने चाकू और उस्तरा खरीदने आई थी। बाद में समाचार पत्र में तस्वीर देखने पर उसने युवती को मुस्कान के रूप में पहचाना।
अभियोजन पक्ष ने इस गवाही को अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के साथ अदालत के सामने रखा। अदालत ने पूरे मामले का मूल्यांकन गवाहों के बयानों और उपलब्ध डिजिटल एवं भौतिक साक्ष्यों के आधार पर किया।
नीले ड्रम से हुआ हत्याकांड का खुलासा
पुलिस के अनुसार, मार्च 2025 में सौरभ राजपूत की हत्या के बाद उनके शव के टुकड़ों को एक नीले प्लास्टिक ड्रम में रखकर सीमेंट और रेत से छिपाया गया था। 18 मार्च को सौरभ के भाई को संदेह हुआ, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। जांच के दौरान ड्रम से शव बरामद हुआ और मामला सामने आया।
अभियोजन पक्ष का आरोप था कि मुस्कान और साहिल ने मिलकर हत्या की साजिश रची और वारदात के बाद हिमाचल प्रदेश के मनाली चले गए। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर मामले की जांच आगे बढ़ाई।
कॉल डिटेल और लोकेशन से जुड़े साक्ष्य
सुनवाई के दौरान मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल रिपोर्ट (सीडीआर) और टावर लोकेशन से जुड़े आंकड़े भी अदालत में पेश किए गए। अभियोजन पक्ष ने इन तकनीकी साक्ष्यों को घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने के लिए महत्वपूर्ण बताया।
इसके अलावा, पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल के निरीक्षण, बरामदगी और जांच से संबंधित जानकारी अदालत के सामने रखी। कुल 22 गवाहों के बयानों के साथ इन साक्ष्यों पर भी विचार किया गया।
अदालत ने दोनों दोषियों को सुनाई फांसी की सजा
30 सितंबर 2026 को जिला एवं सत्र न्यायालय ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को हत्या के मामले में दोषी करार दिया था। इसके बाद 14 अक्टूबर 2026 को अदालत ने दोनों को मृत्युदंड की सजा सुनाई। अदालत ने साक्ष्यों और मामले की गंभीरता पर विचार करते हुए यह फैसला दिया।
सौरभ के परिवार ने जताया संतोष
फैसला सुनाए जाने के बाद सौरभ की मां रेणु देवी ने कहा कि उन्हें अपने बेटे के लिए न्याय मिलने की उम्मीद थी। परिवार लंबे समय से दोषियों के लिए कड़ी सजा की मांग कर रहा था।हालांकि, मृत्युदंड के फैसले के बाद भी मामले की कानूनी प्रक्रिया पूरी होना बाकी है। सजा के क्रियान्वयन से पहले कानून के तहत आगे की न्यायिक प्रक्रिया लागू होगी।





