कीव। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। यूक्रेनी अधिकारियों ने एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स पर आरोप लगाया है कि स्टारलिंक सेवाओं पर अचानक लगाई गई पाबंदियों से यूक्रेन के सैन्य ड्रोन अभियानों पर असर पड़ा है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब रूस ने यूक्रेन के कई इलाकों में मिसाइल और ड्रोन हमले तेज किए हैं।
अचानक प्रतिबंध से यूक्रेन की सैन्य गतिविधियों पर असर
रॉयटर्स की 14 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेनी अधिकारियों ने बताया कि स्टारलिंक की सैन्य उपयोग वाली सेवा पर गति संबंधी प्रतिबंध लगाए गए। यूक्रेन के राष्ट्रपति के सलाहकार सर्ही बेस्क्रेतनोव के अनुसार, 160 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार से उड़ने वाले कुछ ड्रोन के टर्मिनलों का कनेक्शन बाधित हुआ।
यूक्रेनी सैन्य अधिकारियों का कहना है कि कनेक्टिविटी में रुकावट के कारण कई अभियान प्रभावित हुए और कुछ मिशनों को रद्द करना पड़ा। उनके मुताबिक, ड्रोन का संपर्क 10 से 20 सेकंड तक टूटने से उन्हें नियंत्रित करना मुश्किल हो गया।
एलन मस्क ने क्या कहा?
विवाद के बीच एलन मस्क ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि स्टारलिंक की गति या उपयोग पर लगाई जाने वाली सीमाओं का फैसला अमेरिकी सेना और अंततः अमेरिकी राष्ट्रपति करते हैं। उनके इस बयान के बाद सवाल उठा कि युद्ध के दौरान महत्वपूर्ण संचार तकनीक पर नियंत्रण किसका है और इसके फैसलों का सैन्य अभियानों पर क्या असर पड़ सकता है।
रूस पर भी स्टारलिंक के इस्तेमाल के आरोप
इस विवाद की एक दूसरी कड़ी रूस की सेना द्वारा स्टारलिंक टर्मिनलों के कथित अनधिकृत इस्तेमाल से जुड़ी है। यूक्रेनी अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि रूसी सेना के कुछ ड्रोन में भी स्टारलिंक तकनीक का इस्तेमाल किया गया, जिससे उन्हें लंबी दूरी तक संचालन और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से बचने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, इन आरोपों का मतलब यह नहीं है कि स्पेसएक्स ने जानबूझकर रूसी सेना को सेवा उपलब्ध कराई है। फरवरी 2026 में यूरोन्यूज की तथ्य-जांच रिपोर्ट के अनुसार, रूस की ओर से टर्मिनलों के इस्तेमाल के संभावित रास्तों में अवैध खरीद, तीसरे पक्ष के माध्यम से आपूर्ति और युद्धक्षेत्र में उपकरणों पर कब्जा शामिल हैं। स्पेसएक्स पहले कह चुकी है कि वह रूस की सरकार या सेना के साथ कारोबार नहीं करती।
स्टारलिंक यूक्रेन के लिए क्यों अहम है?
स्टारलिंक उपग्रहों के माध्यम से इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराता है। रूस के साथ युद्ध शुरू होने के बाद से यूक्रेन की सेना ने इसका इस्तेमाल अग्रिम मोर्चे पर संचार, सैन्य इकाइयों के बीच समन्वय और ड्रोन संचालन के लिए किया है।
युद्ध के दौरान इसकी कनेक्टिविटी प्रभावित होने से सैन्य अभियानों के साथ-साथ महत्वपूर्ण संचार व्यवस्था पर भी दबाव पड़ सकता है। यही वजह है कि सेवा पर लगाए गए नए प्रतिबंधों को लेकर यूक्रेन में चिंता बढ़ गई है।
यूरोप के सामने भी चुनौती
रॉयटर्स की 14 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोपीय देशों के पास फिलहाल स्टारलिंक का ऐसा तत्काल विकल्प नहीं है, जिसे यूक्रेन की मौजूदा सैन्य व्यवस्था में आसानी से इस्तेमाल किया जा सके। यूरोप अपनी स्वतंत्र उपग्रह संचार क्षमता विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है, लेकिन नई व्यवस्था तैयार होने में समय लग सकता है।
आगे क्या होगा?
यूक्रेनी अधिकारी स्पेसएक्स, अमेरिकी सरकार और नाटो के साथ संपर्क कर प्रतिबंधों की वजह स्पष्ट करने की कोशिश कर रहे हैं। फिलहाल विवाद का केंद्र यह है कि स्टारलिंक पर लागू सीमाओं का फैसला कैसे हुआ, उनका सैन्य अभियानों पर कितना असर पड़ा और भविष्य में यूक्रेन अपनी संचार व्यवस्था को बाहरी निर्भरता से कैसे बचाएगा।





