लखनऊ। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति से जुड़े कानून और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मांग की है कि मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति से संबंधित कानून को रद्द किया जाए और एसआईआर की प्रक्रिया समाप्त की जाए।
ओवैसी की इस मांग ने चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर जारी राजनीतिक बहस को फिर चर्चा में ला दिया है। उनका कहना है कि चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना जरूरी है।
मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के कानून पर सवाल
ओवैसी ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित कानून को रद्द करने की मांग उठाई है। यह कानून नियुक्ति के लिए चयन समिति की व्यवस्था निर्धारित करता है। इस समिति में प्रधानमंत्री, प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय कैबिनेट मंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता शामिल होते हैं।
इस व्यवस्था को लेकर विपक्ष के कुछ नेता सवाल उठाते रहे हैं। उनका तर्क है कि नियुक्ति प्रक्रिया में सरकार की भूमिका और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता के बीच संतुलन होना चाहिए।
एसआईआर खत्म करने की मांग
ओवैसी ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को भी समाप्त करने की मांग की है। इस प्रक्रिया के तहत चुनाव आयोग मतदाता सूची की जांच और अद्यतन करने का काम करता है।
एसआईआर को लेकर राजनीतिक दलों के बीच अलग-अलग मत हैं। जहां इसके समर्थक मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाने की आवश्यकता पर जोर देते हैं, वहीं आलोचक प्रक्रिया के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम छूटने और दस्तावेजों से जुड़ी परेशानियों को लेकर चिंता जताते हैं।
चुनावी पारदर्शिता पर फिर बहस
ओवैसी की मांग के बाद चुनाव आयोग की नियुक्ति व्यवस्था और मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर राजनीतिक चर्चा तेज होने की संभावना है। इन मुद्दों पर किसी भी बदलाव के लिए संबंधित कानूनी और संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन आवश्यक होगा।
फिलहाल, ओवैसी की मांगों पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया के आधार पर आगे की स्थिति स्प





