लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए होने वाला चुनाव अब संख्या बल से आगे बढ़कर रणनीति और अतिरिक्त वोटों के गणित पर टिक गया है। भाजपा जहां अपने आठ उम्मीदवारों की स्थिति मजबूत करने के साथ नौवीं सीट की संभावनाएं तलाश रही है, वहीं समाजवादी पार्टी ने भी तीसरा उम्मीदवार उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। चुनाव में हर उम्मीदवार को जीत के लिए 37 प्रथम वरीयता वाले वोट चाहिए। मतदान 16 अक्टूबर 2026 को होना है।
आठ सीटों के बाद अतिरिक्त वोटों की तलाश
वर्तमान विधानसभा संख्या बल के आधार पर भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए की स्थिति आठ सीटों के लिहाज से मजबूत मानी जा रही है। लेकिन अतिरिक्त सीट के लिए उसे अपने निर्धारित समर्थन से बाहर के विधायकों के वोट जुटाने होंगे। यही वजह है कि छोटे दलों और दूसरे खेमों के विधायकों पर राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं।
राज्यसभा चुनाव के गणित में एक सीट के लिए 37 वोट जरूरी हैं। ऐसे में नौवीं सीट की कोशिश करने वाली किसी भी पार्टी को पर्याप्त अतिरिक्त समर्थन जुटाना होगा। इसी अतिरिक्त वोटों के कारण चुनाव में क्रॉस वोटिंग और विधायकों की भूमिका अहम हो सकती है।
सपा के बागी विधायकों पर भी नजर
भाजपा की रणनीति में समाजवादी पार्टी के असंतुष्ट या बागी विधायकों की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। दूसरी ओर सपा भी भाजपा और एनडीए के उन विधायकों से संपर्क साधने की कोशिश कर रही है, जिनके साथ राजनीतिक मतभेद या आगामी विधानसभा चुनाव से जुड़े समीकरण हैं।
इससे दोनों दलों के बीच क्रॉस वोटिंग की आशंका भी बढ़ गई है। हालांकि कौन विधायक किस उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करेगा, इसका अंतिम फैसला मतदान के दौरान ही स्पष्ट होगा।
सपा ने भी उतारा तीसरा उम्मीदवार
समाजवादी पार्टी के पास मौजूदा संख्या बल के आधार पर दो सीटों के लिए पर्याप्त समर्थन बताया जा रहा है। इसके बावजूद पार्टी ने तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतारा है। इससे मुकाबला सीधे तौर पर अतिरिक्त वोटों और दूसरे दलों के विधायकों के समर्थन पर आ गया है।
अब भाजपा और सपा दोनों की नजर उन विधायकों पर है, जिनके वोट चुनाव के अंतिम गणित को प्रभावित कर सकते हैं। 2024 के राज्यसभा चुनाव में भी उत्तर प्रदेश में क्रॉस वोटिंग देखने को मिली थी, जब भाजपा ने आठ सीटें जीती थीं और सपा को दो सीटों से संतोष करना पड़ा था।
16 अक्टूबर को खुलेगा असली राज
राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान 16 अक्टूबर को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगा और उसी दिन शाम 5 बजे से मतगणना शुरू होगी। चुनाव प्रक्रिया 19 अक्टूबर तक पूरी होनी है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि अतिरिक्त वोटों का गणित किस तरह बदलता है और क्या दोनों खेमों के कुछ विधायक पार्टी लाइन से अलग मतदान करते हैं। ऐसे में राज्यसभा चुनाव यूपी की आगामी विधानसभा राजनीति से पहले विधायकों के रुख और दोनों दलों की रणनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।





