नई दिल्ली। भारतीय निशानेबाजी की दुनिया में ईशा सिंह ने बेहद कम उम्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। महज नौ साल की उम्र में पिस्टल थामने वाली ईशा ने कड़ी मेहनत और शानदार प्रदर्शन के दम पर कम उम्र में ही राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना ली। 13 वर्ष की उम्र में राष्ट्रीय चैंपियन बनने के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी भारत का नाम रोशन किया।
ईशा का निशानेबाजी से जुड़ाव अचानक नहीं हुआ। छोटी उम्र से ही उन्होंने इस खेल में गहरी रुचि दिखाई और लगातार अभ्यास के जरिए अपनी तकनीक को निखारा। उनकी मेहनत का परिणाम तब सामने आया, जब उन्होंने राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम किए।
25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में ईशा ने अपनी सटीक निशानेबाजी से खास पहचान बनाई। इसी स्पर्धा में उनके नाम विश्व रिकॉर्ड भी दर्ज हुआ, जिसने उन्हें भारतीय निशानेबाजी की उभरती हुई प्रतिभाओं में शामिल कर दिया।
ईशा की खासियत सिर्फ उनकी कम उम्र नहीं, बल्कि दबाव के बीच बेहतरीन प्रदर्शन करने की क्षमता भी रही है। बड़े अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में अनुभवी खिलाड़ियों के बीच उन्होंने आत्मविश्वास के साथ निशाना साधा और कई मौकों पर भारत के लिए पदक जीतने में अहम भूमिका निभाई।
उनकी कहानी उन युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है, जो छोटी उम्र में किसी खेल को अपना करियर बनाने का सपना देखते हैं। नौ साल की उम्र में शुरू हुआ सफर राष्ट्रीय चैंपियनशिप से होते हुए अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचा और ईशा सिंह ने साबित किया कि प्रतिभा के साथ निरंतर अभ्यास और अनुशासन हो तो





