मुंबई। बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता प्रेम चोपड़ा आज 91 वर्ष के हो गए हैं। 23 सितंबर 1935 को लाहौर में जन्मे प्रेम चोपड़ा ने फिल्मों में आने का सपना लेकर मुंबई का रुख किया था। लेकिन फिल्मी दुनिया में पहचान बनाने से पहले उन्हें अखबार की नौकरी करनी पड़ी।
अखबार की नौकरी के साथ जारी रखा फिल्मी संघर्ष
मुंबई पहुंचने के बाद प्रेम चोपड़ा ने द टाइम्स ऑफ इंडिया के सर्कुलेशन विभाग में काम किया। उनके जिम्मे बंगाल, ओडिशा और बिहार में अखबार के वितरण से जुड़ा काम था। नौकरी के कारण उन्हें महीने में करीब 20 दिन यात्राएं करनी पड़ती थीं। वह अपने काम को जल्द पूरा कर मुंबई लौटते और बाकी समय फिल्म स्टूडियो के चक्कर लगाते थे।
ट्रेन के सफर ने बदल दी जिंदगी
उनके करियर का अहम मोड़ एक ट्रेन यात्रा के दौरान आया। एक व्यक्ति की नजर प्रेम चोपड़ा पर पड़ी और उनसे फिल्मों में काम करने के बारे में पूछा गया। इसके बाद उन्हें पंजाबी फिल्म ‘चौधरी करनैल सिंह’ में काम करने का मौका मिला। 1960 में आई यह फिल्म राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से भी सम्मानित हुई। बताया जाता है कि इस पहली फिल्म के लिए उन्हें करीब 2,500 रुपये मिले थे।
हीरो बनने आए, खलनायक के रूप में मिली पहचान
प्रेम चोपड़ा ने शुरुआत में फिल्मों में हीरो बनने का सपना देखा था। हिंदी सिनेमा में शुरुआती दौर के बाद उनके करियर ने अलग दिशा पकड़ी और नकारात्मक भूमिकाओं ने उन्हें खास पहचान दिलाई। ‘वो कौन थी?’, ‘शहीद’, ‘तीसरी मंजिल’, ‘मेरा साया’ और ‘उपकार’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय ने उनकी खलनायक वाली छवि को मजबूत किया।
‘बॉबी’ का एक संवाद बना अमर पहचान
1973 की राज कपूर निर्देशित फिल्म ‘बॉबी’ में प्रेम चोपड़ा की भूमिका अपेक्षाकृत छोटी थी, लेकिन उनका संवाद ‘प्रेम नाम है मेरा, प्रेम चोपड़ा’ दर्शकों के बीच बेहद चर्चित हुआ। यह संवाद आज भी उनके फिल्मी करियर की पहचान माना जाता है।
छह दशक से अधिक लंबे करियर में प्रेम चोपड़ा ने सैकड़ों फिल्मों में काम किया। उनकी खास संवाद अदायगी, स्क्रीन प्रेजेंस और अलग अंदाज ने उन्हें हिंदी सिनेमा के चर्चित खलनायक अभिनेताओं में स्थापित किया।
🎬 जन्मदिन पर खास
अखबार की नौकरी से शुरू हुआ सफर, ट्रेन में मिले एक मौके से बदली किस्मत और फिर फिल्मों में ऐसा मुकाम—प्रेम चोपड़ा की कहानी संघर्ष से सफलता तक के सफर की मिसाल है।





