लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका बयान ऐसे समय आया है जब निर्वाचन आयोग के भीतर विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े फैसलों को लेकर कथित असहमति की रिपोर्ट सामने आई है।
अखिलेश यादव ने क्या कहा?
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि कुछ लोग सत्ता की “कठपुतली” बनकर काम कर रहे हैं और इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि यदि निर्वाचन आयोग के भीतर ही फैसलों को लेकर आपत्तियां दर्ज की गई हैं, तो यह गंभीर विषय है। उन्होंने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने की मांग भी की।
10 महीने में 14 आपत्तियों की रिपोर्ट
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, निर्वाचन आयोग के दो चुनाव आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—ने पिछले करीब 10 महीनों में SIR से जुड़े विभिन्न फैसलों और आदेशों पर कथित तौर पर 14 बार आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कुछ फैसलों को लेकर दोनों आयुक्तों ने अपनी असहमति जताई थी।
चुनाव आयोग की ओर से क्या कहा गया?
इन रिपोर्टों के बीच निर्वाचन आयोग ने कहा है कि आयोग के फैसले सर्वसम्मति से लिए जाते हैं और व्यक्तिगत स्तर पर किसी अधिकारी द्वारा दर्ज की गई आपत्ति को पूरे आयोग का मत नहीं माना जाना चाहिए। इस तरह आयोग ने विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोपों पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है।
2027 के यूपी चुनाव पर नजर
उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में मतदाता सूची, SIR और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े मुद्दे राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण बन गए हैं। अखिलेश यादव लगातार इन मुद्दों को उठाते हुए चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल कर रहे हैं। वहीं, निर्वाचन आयोग अपने फैसलों को सामूहिक और सर्वसम्मत प्रक्रिया के तहत लिए जाने की बात कह रहा है।





