रियाद/लंदन। सऊदी अरब की महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन पर ड्रोन हमले के बाद कच्चे तेल की आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक, सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको ने कम-से-कम दो यूरोपीय रिफाइनरियों को अक्टूबर में कच्चे तेल की आपूर्ति नहीं करने की जानकारी दी है।
तीन पंपिंग स्टेशनों को नुकसान
रॉयटर्स के मुताबिक, हमले में पाइपलाइन से जुड़े तीन पंपिंग स्टेशनों को नुकसान पहुंचा है। करीब 1,200 किलोमीटर लंबी यह पाइपलाइन सऊदी अरब के पूर्वी तेल क्षेत्रों से लाल सागर के यानबू बंदरगाह तक कच्चा तेल पहुंचाती है। इसकी क्षमता लगभग 40 से 50 लाख बैरल प्रतिदिन बताई गई है।
यूरोप को क्यों नहीं मिलेगा तेल?
यानबू से होने वाली आपूर्ति यूरोपीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण है। पाइपलाइन बंद होने से वहां से तेल लोडिंग प्रभावित हुई है। ऐसे में अरामको ने कुछ यूरोपीय ग्राहकों की अक्टूबर की आपूर्ति रोकने का फैसला किया है। पोलैंड की कंपनी Orlen सहित कुछ खरीदार वैकल्पिक स्रोतों से कच्चा तेल जुटाने की कोशिश कर रहे हैं।
सऊदी ने अपनाया वैकल्पिक रास्ता
रिपोर्टों के अनुसार, अरामको यूरोप की प्रभावित आपूर्ति के बीच कुछ कच्चे तेल को ओमान के सोहर के पास जहाज से जहाज में स्थानांतरित कर एशियाई ग्राहकों तक पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। कंपनी पाइपलाइन को आंशिक रूप से जल्द चालू करने और पूरी क्षमता बहाल करने में करीब छह सप्ताह तक लगने की संभावना के बीच काम कर रही है।
हमले की वजह क्या है?
सऊदी अधिकारियों के अनुसार ड्रोन इराक की ओर से लॉन्च किए गए थे। रॉयटर्स ने भी उद्योग सूत्रों और सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर पाइपलाइन के तीन पंपिंग स्टेशनों को नुकसान की जानकारी दी है। हमले की जिम्मेदारी किसी संगठन द्वारा सार्वजनिक रूप से स्वीकार किए जाने की पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं है।
असर: यूरोपीय रिफाइनरियों को अब सऊदी तेल की जगह दूसरे स्रोतों से कच्चा तेल खरीदना पड़ सकता है, जिससे क्षेत्रीय तेल बाजार और आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ सकता है।





