बिना मकान नंबर और बिना आराजी नंबर के हो गई करोड़ों की सम्पत्ति की रजिस्ट्री, जांच के घेरे में व्यवस्था
गोरखपुर। शहर की घनी आबादी वाले क्षेत्रों में स्थित करोड़ों रुपये मूल्य की जमीनों और मकानों पर भूमाफियाओं की नजर लगातार बनी हुई है। खासकर पुराने जमींदारी क्षेत्र, जहां लोग कई पीढ़ियों से निवास कर रहे हैं लेकिन भूमि अभिलेखों की स्थिति स्पष्ट नहीं है, वहां अवैध खरीद-फरोख्त का खेल तेजी से फल-फूल रहा है। ऐसे मामलों में केवल भूमाफियाओं की सक्रियता ही नहीं, बल्कि संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शहर के खूनीपुर और रहमतनगर मोहल्ले की सीमा पर स्थित एक बहुमूल्य जमीन/मकान को लेकर हाल ही में दो संदिग्ध रजिस्ट्रियां कराई गईं। बताया जा रहा है कि जून और जुलाई माह में संपन्न हुई इन दोनों रजिस्ट्रियों में न तो संबंधित मकान का नंबर दर्ज किया गया और न ही भूमि का आराजी नंबर अंकित किया गया। इसके बावजूद करोड़ों रुपये मूल्य की संपत्ति का बैनामा आसानी से संपन्न हो गया।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब किसी संपत्ति की पहचान के लिए आवश्यक विवरण—जैसे मकान नंबर, आराजी संख्या अथवा अन्य राजस्व अभिलेख—रजिस्ट्री दस्तावेज में मौजूद ही नहीं थे, तब आखिर किस आधार पर पंजीयक कार्यालय में दस्तावेजों का पंजीकरण कर दिया गया? क्या दस्तावेजों का सत्यापन किया गया था? यदि किया गया था तो उसमें क्या पाया गया? और यदि सत्यापन नहीं हुआ, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है?
जानकारों का कहना है कि किसी भी अचल संपत्ति की रजिस्ट्री के दौरान उसकी स्पष्ट पहचान और अभिलेखीय विवरण का होना अत्यंत आवश्यक माना जाता है। ऐसे में बिना आवश्यक विवरण के दस्तावेजों का पंजीकरण होना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। इस पूरे प्रकरण में रजिस्ट्री कार्यालय से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है। हालांकि अभी तक किसी अधिकारी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब उक्त जमीन/मकान पर कई पीढ़ियों से निवास और कब्जा होने का दावा करने वाले लोगों ने जून माह में हुई रजिस्ट्री को फर्जी बताते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत दी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि उनकी जानकारी और सहमति के बिना संपत्ति की रजिस्ट्री कर दी गई, जिससे उनके अधिकारों पर सीधा संकट उत्पन्न हो गया है।
सूत्रों के अनुसार पुलिस ने शिकायत की प्रारंभिक जांच की। जांच में प्रथम दृष्टया शिकायत सही पाए जाने के बाद कोतवाली थाना पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। अब पुलिस पूरे प्रकरण की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि रजिस्ट्री किन परिस्थितियों में हुई, दस्तावेज किसने तैयार किए, किन लोगों ने गवाही दी तथा प्रक्रिया में किन-किन अधिकारियों की भूमिका रही।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर के पुराने मोहल्लों में इस तरह के कई मामले सामने आ चुके हैं, जहां वर्षों से आबाद परिवारों की संपत्तियों को कागजी हेराफेरी के माध्यम से विवादित बनाने या कब्जाने का प्रयास किया गया। उनका कहना है कि यदि समय रहते ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो भूमाफियाओं का मनोबल और बढ़ेगा तथा आम नागरिकों की संपत्ति सुरक्षित नहीं रह पाएगी।
अब निगाहें पुलिस जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि जांच में रजिस्ट्री प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता या अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आती है तो यह मामला केवल फर्जी रजिस्ट्री तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी तंत्र की जवाबदेही पर भी बड़े सवाल खड़े करेगा।





