जिलाध्यक्ष एड. मोहीउद्दीन बोले— शिक्षा संस्थानों को बचाना राष्ट्रीय हित में, हजारों छात्रों के भविष्य से जुड़ा है मामला
फतेहपुर। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने मोहम्मद अली जौहरी यूनिवर्सिटी की प्रस्तावित ध्वस्तीकरण कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग को लेकर सोमवार को राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपा। एआईएमआईएम के जिलाध्यक्ष एडवोकेट मोहीउद्दीन फ़ारूकी के नेतृत्व में पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय को नियमानुसार रेगुलराइज कर पूर्ववत संचालित रखने की मांग करते हुए कहा कि किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई से पहले हजारों छात्र-छात्राओं के भविष्य और शिक्षा के अधिकार को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि मोहम्मद अली जौहरी यूनिवर्सिटी प्रदेश के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में शामिल है, जहां उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों के हजारों छात्र-छात्राएं उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। ऐसे में यदि विश्वविद्यालय की इमारतों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाती है तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों की शिक्षा और उनके भविष्य पर पड़ेगा। जिलाध्यक्ष एडवोकेट मोहीउद्दीन फ़ारूकी ने दावा किया कि विश्वविद्यालय परिसर की कुल 40 इमारतों में से 38 को ध्वस्तीकरण का नोटिस जारी किया गया है।
उन्होंने कहा कि यदि इन भवनों को ध्वस्त किया जाता है तो केवल भवनों का ही नुकसान नहीं होगा, बल्कि हजारों विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित होगी और उनके परिवारों की उम्मीदों को भी गहरा आघात पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल ईंट, पत्थर और सीमेंट का ढांचा नहीं होता, बल्कि वह ज्ञान, शोध और सामाजिक विकास का केंद्र होता है। ऐसे संस्थानों को संरक्षित करना सरकार की जिम्मेदारी है। यदि किसी प्रकार की प्रशासनिक या तकनीकी आपत्तियां हैं तो उनका समाधान वैधानिक प्रक्रिया के तहत रेगुलराइजेशन, समायोजन अथवा निर्धारित शुल्क जमा कराकर निकाला जा सकता है, न कि ध्वस्तीकरण जैसी कार्रवाई के माध्यम से।
एडवोकेट मोहीउद्दीन फ़ारूकी ने कहा कि शिक्षा प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और सरकार का दायित्व है कि शिक्षा संस्थानों को सुरक्षित एवं सुचारु रूप से संचालित रखने की दिशा में कदम उठाए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की इमारतों के ध्वस्तीकरण से न केवल वर्तमान छात्र प्रभावित होंगे, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की शिक्षा पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
ज्ञापन में महामहिम राष्ट्रपति से अनुरोध किया गया कि मामले में हस्तक्षेप कर संबंधित अधिकारियों को प्रस्तावित ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर रोक लगाने के निर्देश दिए जाएं। साथ ही विश्वविद्यालय को नियमानुसार नियमित (रेगुलराइज) कर उसकी शैक्षणिक गतिविधियों को पूर्ववत जारी रखने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इस अवसर पर एआईएमआईएम की महिला जिलाध्यक्ष यासमीन बेगम, अरशद, हिना, जेबा खान, कासिम सिद्दीकी, अमर सिंह एडवोकेट, मजहर एडवोकेट, पार्टी के उपाध्यक्ष मोहम्मद अनवर, आजाद सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता, सामाजिक कार्यकर्ता एवं पार्टी पदाधिकारी उपस्थित रहे।





