भारत-नेपाल सीमा स्थित खुनुवां बॉर्डर पर परिवहन विभाग की हालिया कार्रवाई ने सीमा क्षेत्र में मालवाहक वाहनों के संचालन को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच के दौरान ऐसे वाहन पकड़े गए जिनके फिटनेस, बीमा, रोड टैक्स और परमिट वर्ष 2022 से ही समाप्त थे, लेकिन इसके बावजूद वे लगातार भारत से नेपाल और नेपाल से भारत के बीच माल ढुलाई कर रहे थे। आरटीओ की जांच में सामने आया कि कुछ वाहन वर्षों से बिना वैध दस्तावेजों के संचालित हो रहे थे। कार्रवाई के दौरान दो वाहनों के चालक वाहन छोड़कर फरार भी हो गए। इससे यह चर्चा और तेज हो गई है कि आखिर इतने लंबे समय से ये वाहन किसके संरक्षण में सीमा मार्ग पर बेखौफ दौड़ रहे थे।
जानकारों का कहना है कि खुनुवां बॉर्डर से प्रतिदिन बड़ी संख्या में मालवाहक वाहन नेपाल के लिए रवाना होते हैं। ऐसे में चार साल से अधिक समय से दस्तावेज विहीन वाहनों का संचालन होना निगरानी व्यवस्था पर सवालिया निशान लगाता है। स्थानीय लोगों का भी कहना है कि यदि समय-समय पर प्रभावी जांच होती रहती तो ऐसे वाहन पहले ही पकड़ में आ जाते। बुधवार को हुई कार्रवाई के बाद ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े लोगों में भी चर्चा है कि जिन वाहनों के कागजात वर्षों पहले समाप्त हो चुके थे, वे लगातार अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्ग पर कैसे चल रहे थे। लोगों का कहना है कि यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं बल्कि सड़क सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा है।
एआरटीओ संजय सिंह ने बताया कि जांच के दौरान जिन वाहनों में अनियमितताएं मिलीं, उनके खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि बिना वैध फिटनेस, बीमा, रोड टैक्स और परमिट वाले वाहनों को किसी भी स्थिति में संचालन की अनुमति नहीं दी जा सकती। ऐसे वाहनों के खिलाफ आगे भी विशेष अभियान चलाया जाएगा। खुनुवां बॉर्डर जैसे संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्ग पर यदि वर्ष 2022 से समाप्त दस्तावेजों वाले वाहन लगातार संचालित हो रहे थे, तो आखिर उनकी निगरानी कौन कर रहा था? यह सवाल अब स्थानीय लोगों के साथ-साथ व्यापारियों और परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। फिलहाल आरटीओ की कार्रवाई ने इतना जरूर साफ कर दिया है कि सीमा मार्ग पर चल रहे वाहनों के दस्तावेजों की गहन जांच की जरूरत है, ताकि नियमों की अनदेखी करने वालों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।





