गोण्डा। करनैलगंज तहसील अंतर्गत परसपुर ब्लॉक के भौरीगंज स्थित पवित्र सरयू नदी घाट की बदहाल स्थिति को लेकर संत समाज और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है। घाट पर फैली गंदगी, नदी में गिरते गंदे नाले और जल प्रवाह बाधित होने से श्रद्धालुओं की आस्था आहत हो रही है। मामले को लेकर संत-महात्माओं ने आमरण अनशन शुरू कर दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रसिद्ध संत बाबा गोकर्ण दास फलाहारी बाबा ने आरोप लगाया है कि सरयू नदी पुल के नीचे बड़े-बड़े बोल्डर और मलबा डाले जाने से नदी का प्राकृतिक जल प्रवाह प्रभावित हो गया है। वहीं भौरीगंज बाजार का गंदा नाला सीधे पवित्र सरयू नदी में गिराया जा रहा है, जिससे नदी का जल लगातार प्रदूषित और जहरीला होता जा रहा है।
संत समाज का कहना है कि गंदगी और प्रदूषण के चलते नदी में मछलियां मर रही हैं तथा घाट पर स्नान करने आने वाले श्रद्धालुओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। घाट के आसपास दुर्गंध का माहौल बना हुआ है, जिससे धार्मिक वातावरण भी प्रभावित हो रहा है। वर्तमान समय में मलमास का पावन पर्व चल रहा है। ऐसे में दूर-दराज के गांवों और क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु सरयू स्नान और पूजा-अर्चना के लिए घाट पर पहुंच रहे हैं। लेकिन घाट की बदहाल स्थिति देखकर श्रद्धालुओं में भी नाराजगी देखने को मिल रही है। इसी गंभीर समस्या को लेकर बाबा गोकर्ण दास फलाहारी बाबा के नेतृत्व में कई संत-महात्मा एवं स्थानीय नागरिक आमरण अनशन पर बैठ गए हैं। आंदोलनकारियों ने साफ कहा है कि जब तक घाट की समुचित सफाई, गंदे नाले की व्यवस्था और नदी के जल प्रवाह को सुचारु नहीं किया जाएगा, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि घाट पर सफाई कर्मचारियों की कोई तैनाती नहीं है और जनप्रतिनिधि भी इस गंभीर मुद्दे पर मौन बने हुए हैं। लोगों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर सरयू घाट को स्वच्छ, सुरक्षित और श्रद्धालुओं के अनुकूल बनाने की मांग की है। संत समाज ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। इस संबंध में उपजिलाधिकारी कर्नलगंज नेहा मिश्रा ने बताया कि उन्हें जानकारी मिली है। स्थिति का जायजा लेने और अनशनकारियों की मांगों को समझने के लिए अधिकारियों को मौके पर भेजा जा रहा है।





