गाजीपुर। साहित्य चेतना समाज के तत्वावधान में ‘चेतना-प्रवाह’ कार्यक्रम के अन्तर्गत अन्तरराष्ट्रीय चाय दिवस के अवसर पर संस्था के संस्थापक अमरनाथ तिवारी अमर के स्वामी विवेकानन्द काॅलोनी स्थित आवास पर चाय पार्टी आयोजित की गई।कार्यक्रम में उपस्थित कवियों ने चाय की चुस्कियों के साथ अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कर श्रोताओं को रससिक्त कर दिया। युवा व्यंग्यकार आशुतोष श्रीवास्तव ने ‘गाड़ी काली शीशे काले अंदर बैठे संत/बाहर भूखी जनता बोले -वाह! बड़े भगवंत’ सुनाकर धर्म के नाम पर बढ़ रहे आडम्बर पर करारा व्यंग्य किया।संजय कुमार पाण्डेय ने अपने मधुर स्वर में अपना हास्य गीत ‘तुम खाते ही रहते हो जब तक न कोई टोके,जब तक न कोई रोके/अब मान भी जाओ,मत खाओ,थोड़ा तो शरमाओ’ सुनाकर सभी को हँसने के लिए मजबूर कर दिया।वरिष्ठ व्यंग्यकार अमरनाथ तिवारी अमर ने ‘करूंगा अनशन, प्रदर्शन और फर्जी बवाल/समय-समय पर चलूंगा दल-बदल की चाल/बनूंगा नेता फिर मिनिस्टर/अपना भी होगा एक स्तर’ सुनाकर राजनीतिक गिरावट पर ध्यान आकृष्ट कराया। वरिष्ठ कवि दिनेश चन्द्र शर्मा की पंक्तियां ‘आग नफरत की तुम तो लगाते रहे/इस आग को हम बुझाते रहे’ खूब सराही गईं।सुपरिचित गीतकार-ग़ज़लकार कुमार नागेश ने ‘जब-जब उनका दीदार मिले/सब गम भूला सा लगता है/सौ बार मिला वो चाँद मगर/हर बार नया सा लगता है’ सुनाकर श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी।





