Saturday, May 16, 2026
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चीन से लौटने के बाद ईरान पर हमले की तैयारी में ट्रंप, क्या फिर से शुरू होगा ऑपरेशन एपिक फ्यूरी?

चीन से लौटने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप पर ईरान युद्ध को लेकर दबाव बढ़ रहा है। पेंटागन ने कूटनीति विफल होने पर ऑपरेशन एपिक फ्यूरी सहित सैन्य कार्रवाई की योजनाएं तैयार की हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप शुक्रवार को चीन से लौटकर अपने देश पहुंच गए। ईरान युद्ध को लेकर उन पर दबाव बढ़ता जा रहा है और अगर कूटनीति नाकाम रहती है तो उनके टॉप सहयोगी तेहरान के खिलाफ फिर से मिलिट्री कार्रवाई के लिए विकल्प तैयार कर रहे हैं।

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पेंटागन के अधिकारियों ने एक नए मिलिट्री अभियान के तहत फिर से हमले शुरू करने की योजना का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। अप्रैल में हुए सीजफायर के दौरान ऑपरेशन एपिक फ्यूरी को रोक दिया गया था। हालांकि, ट्रंप ने अभी तक कोई फाइनल फैसला नहीं किया है।

सफलता का मौका ढूंढ़ रहे ट्रंप

ईरान के ताजा शांति प्रस्ताव का जिक्र करते हुए ट्रंप ने एयर फोर्स वन में पत्रकारों से कहा, “मैंने इसे देखा और अगर मुझे इसका पहला ही वाक्य पसंद नहीं आता तो मैं इसे फेंक देता हूं।”

रिपोर्ट में कहा गया है कि यूएस, इजरायल और क्षेत्रीय अधिकारी एक ऐसे समझौते की कोशिश कर रहे हैं, जिससे ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोल दे। इससे ट्रंप को इस महंगे संघर्ष को लेकर देश के अंदर बढ़ रही आलोचना के बीच एक कूटनीतिक सफलता का दावा करने का मौका मिल जाएगा।

पेंटागन ने तनाव बढ़ाने के विकल्प तैयार किए

रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने इस हफ्ते सांसदों से कहा कि अमेरिकी सेना के पास जरूरत पड़ने पर तनाव बढ़ाने की योजना है। साथ ही सेना की तैनाती कम करने के विकल्प भी खुले रखे गए हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि पेंटागन ने कई मिलिट्री परिदृश्य तैयार किए हैं, जिनमें ईरान के मिलिट्री और इंफ्रास्ट्रक्चर ठिकानों को निशाना बनाकर जोरदार बमबारी करना भी शामिल है।

एक और विकल्प में कथित तौर पर यूएस स्पेशल ऑपरेशंस सैनिकों को तैनात करना शामिल है ताकि उस अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम को सुरक्षित किया जा सके, जिसके बारे में माना जाता है कि वह ईरान की इस्फहान परमाणु सुविधा के अंदर जमीन के बहुत नीचे जमा है।

न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, इस साल की शुरुआत में ऐसी आपात स्थितियों से निपटने की तैयारी के लिए सैकड़ों स्पेशल ऑपरेशंस कर्मियों को मिडिल-ईस्ट भेजा गया था। हालांकि, अधिकारियों ने माना कि किसी भी जमीनी ऑपरेशन में जान-माल के नुकसान का बड़ा जोखिम होगा और इसके लिए हजारों सहायक सैनिकों की जरूरत पड़ेगी।

ईरान ने क्या संकेत दिया?

इस बीच, ईरान ने फिर से दुश्मनी शुरू करने की तैयारी का संकेत दिया है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर गालिबफ ने कहा, “हमारी सेना किसी भी हमले का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार है।”

होर्मुज स्ट्रेट चिंता का विषय

होर्मुज स्ट्रेट इस संकट के केंद्र में बना हुआ है, जहां एक तरफ ईरान तेल परिवहन के इस अहम रास्ते को पूरी तरह से खोलने से इनकार कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका ने अपनी नाकेबंदी जारी रखी है।

चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ बातचीत के बाद ट्रंप ने कहा कि वॉशिंगटन और बीजिंग दोनों इस बात पर सहमत हैं कि स्ट्रेट को फिर से खोला जाना चाहिए। बीजिंग में रहते हुए ट्रंप ने कहा, “हम नहीं चाहते कि उनके पास परमाणु हथियार हों, हम चाहते हैं कि जलडमरूमध्य खुला रहे।”

ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ उनका सब्र खत्म होता जा रहा है और उन्होंने तेहरान को कोई समझौता करने की चेतावनी दी। हालांकि, चीन ने सार्वजनिक तौर पर यह संकेत देने से परहेज किया कि वह ईरान पर सीधे तौर पर दबाव डालेगा।

ईरान हार मानने को नहीं तैयार

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि तेहरान कूटनीति के लिए तैयार है, लेकिन पिछली बातचीत के बाद हुए हवाई हमलों को देखते हुए उसे वॉशिंगटन पर भरोसा नहीं है। इस क्षेत्र में भारी सैन्य मौजूदगी बनी हुई है। इस पूरे क्षेत्र में 50,000 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक, दो विमानवाहक पोत, कई विध्वंसक जहाज और कई लड़ाकू विमान तैनात हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी जनरल डैन केन ने कहा कि सैन्य अधिकारियों के पास अपने नागरिक नेताओं के लिए कई विकल्प मौजूद हैं और वे उन्हें बनाए रखेंगे। हफ्तों तक चले हमलों के बावजूद, अमेरिकी खुफिया आकलन बताते हैं कि ईरान ने अपनी ज्यादातर मिसाइल लॉन्च सुविधाओं और भूमिगत सैन्य बुनियादी ढांचे तक पहुंच फिर से हासिल कर ली है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि तेहरान ने होर्मुज स्ट्रेट के किनारे स्थित अपनी 33 मिसाइल साइटों में से 30 तक परिचालन पहुंच फिर से हासिल कर ली है। तनाव बढ़ने की आशंकाओं के बीच तेल की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं।

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