साल दर साल खुलेआम लूटे जाते रहे अभिभावकों को नहीं मिली राहत, मुसीबत जस की तस।
प्राइवेट स्कूल रूपी दुकानों से अभिभावक परेशान, बच्चे भी डिप्रेशन का शिकार।
कानपुर। प्राइवेट स्कूल संचालकों की मनमानी लगातार जारी है। जैसे पिछले सालों में लगातार अभिभावकों पर स्कूलों द्वारा भारीभरकम लोड डाला जाता रहा है, नए शिक्षा सत्र में वैसा ही हाल फिर है। आये दिन अभिभावकों की स्कूल संचालकों से नोकझोंक और खींचतान जारी है। प्राइवेट स्कूल संचालको द्वारा भारी भरकम फीस, कॉपी किताबों, ड्रेस आदि के मनमानी बजट से अधिकतर अभिभावकों में नाराजगी देखने को मिल रही है। आक्रोशित अभिभावक स्कूल संचालकों के इस मनमानी की शासन, प्रसाशन के पास शिकायत करते हैं, कहीं जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन देकर अपनी बात रखते हैं। लेकिन फिर भी शहर के अभिभावकों का यही कहना है कि आश्वासन के नाम आजतक लॉलीपॉप के अलावा उन्हें कुछ नहीं मिला। जिससे प्राइवेट स्कूल रूपी दुकाने चला रहे संचालकों के हौसले बुलंद है।
स्कूलों द्वारा मनमानी पैसों की डिमांड से, बच्चों में डिप्रेशन…..
अच्छी शिक्षा हर कोई अपने बच्चे को देना चाहता है, जिसके लिए लोग स्कूलों में बच्चे का एडमिशन करवाने पहुंचते हैं। लेकिन स्कूल संचालकों द्वारा बनाये गए नियम कायदे और कानून सुनकर अभिभावकों के पैरों तले जमीन खिसक जाती है। स्कूलों द्वारा बताए गए तरह तरह के खर्चों और शर्तों से जहां अभिभावक डिस्टर्ब होते हैं वहीं बच्चों पर भी इसका बुरा असर पड़ता है।
स्कूलों की मनमानी और भारी भरकम खर्चे की बातें जब बच्चों के माता पिता घर में करते और परेशान होते दिखते हैं तो बच्चे भी डिप्रेशन में हो रहे हैं।
आदतों से बाज नहीं आए प्राइवेट स्कूल, जारी है खुली लूट….
प्राइवेट स्कूल संचालक आज तक अपनी आदतों से बाज नहीं आये, जबकि न जाने कितनी निगरानी समितियां बनीं, न जाने कितने कार्रवाई के डर दिखाए गए।इन समितियों और निगरानी कमेटियों सहित कार्रवाई के डर के आगे प्राइवेट स्कूल संचालकों मनमानी निरन्तर जारी है। पढ़ाई के नाम पर की जा रही खुली लूट के कारण, नया शिक्षा सत्र शुरू होते ही प्राइवेट स्कूल एक बार फिर चर्चा में हैं।





