जब हमारा मन निर्मल होगा तभी राम रुपी ब्रह्म की होगी प्राप्ति : आचार्य
सिद्धार्थनगर। नौगढ़ ब्लॉक अन्तर्गत ग्राम पंचायत साहा में आयोजित नौ दिवसीय श्रीविष्णु महायज्ञ में रविवार सायं काल श्रीराम चरित मानस की कथा में राम जन्मोत्सव की अनुपम चरित्र सुनाते हुए अयोध्या धाम से आये प्रसिद्ध कथा व्यास आचार्य ब्रह्मानंद शास्त्री ने कहा कि अयोध्या नरेश महाराज दशरथ को पुत्र प्राप्ति होने पर अत्यंत प्रसन्नता हुई।
अवध रुपी जीवन में जब श्रीराम का जन्म हुआ, तो पूरे अवध में प्रसन्नता झा गई, अर्थात मानव जीवन में रामत्व का भाव आ जाने से जीवन आनंदमय हो जाता है। अपने आराध्य के अनुपम कथा सुनकर यदि आप भाव विभोर नहीं हुए तो आप के अंदर अच्छे श्रोता के लक्षण नहीं है।
जिसमें मन रमण करे वहीं राम है, राम रुपी ब्रह्म की प्राप्ति के लिए उनपर हमें विश्वास करना चाहिए। जब हमारा मन निर्मल होगा तभी राम रुपी ब्रह्म की प्राप्त होगी। ज्ञान नहीं होगा तो जीवन दूसरे पर निर्भर रहेगा। प्रभु श्रीराम स्वयं ज्ञान के सागर होने पर भी गुरु के आश्रम में अध्ययन के लिए गये। उनका पूरा जीवन आदर्श का प्रतिमूर्ति हैं।
आप सभी बुजुर्गो का सम्मान करेंगे तो जीवन की तमाम समस्या का समाधान हो जायेगा। भगवान स्वयं प्रातः काल उठने के बाद अपने माता-पिता व गुरु को प्रणाम करते थे। संस्कार में ही परमात्मा का वास होता है, अपने बच्चों को अच्छा संस्कार अवश्य दें।
विश्वामित्र के आगमन पर दशरथ ने अपने पुत्र से प्रणाम कराया। रविवार को प्रभु के बाल लीलाओं का विशिष्ट निरुपण, माताओं द्वारा पुत्र का बाल श्रृंगार, गुरु वशिष्ठ द्वारा प्रभु का नामकरण संस्कार, यज्ञोपवीत संस्कार, भगवान का गुरुकुल में अध्ययन, विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा, मरीच सुबाहु आदि राक्षसों का वध, अहल्या उद्धार आदि प्रसङ्ग का वर्णन किया। सप्त दिवसीय श्रीराम कथा ज्ञानयज्ञ कार्यक्रम में मुख्य यजमान श्रीकांत शुक्ल, ऋषिदेव ओझा, राजेन्द्र शुक्ल, रामकुमार पाण्डेय, अनंत शुक्ल सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहें।





