Saturday, February 21, 2026
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घर बैठे गर्भवती महिलाओं को मिलेगा विशेषज्ञ इलाज, लॉन्च हुआ मेटरनिटी केयर एप्लीकेशन

एसजीपीजीआई लखनऊ ने कार्डिया हेल्थ केयर और वी केयर डेनमार्क के साथ मिलकर ‘एसजीपीजीआई मेटरनिटी केयर’ ऐप लॉन्च किया है। यह ऐप गर्भवती महिलाओं, खासकर हाई-रिस्क वाली महिलाओं को घर बैठे विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श और फॉलो-अप सुविधा प्रदान करेगा।

लखनऊ। गर्भवती महिलाओं, विशेषकर हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी से जूझ रही महिलाओं के लिए बड़ी राहत की पहल करते हुए संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (पीजीआई) के मातृ एवं प्रजनन स्वास्थ्य (एमआरएच) विभाग ने कार्डिया हेल्थ केयर और वी केयर डेनमार्क के साथ मिलकर एस जी पी जीआइ ‘मेटरनिटी केयर’ एप्लीकेशन लॉन्च किया है। इस डिजिटल पहल के जरिए अब गर्भवती महिलाओं को घर बैठे भी विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श और नियमित फॉलो-अप की सुविधा मिल सकेगी।

एप का शुभारंभ विभाग के स्थापना दिवस के अवसर पर अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा शिक्षा, अमित कुमार घोष , निदेशक प्रो. आर.के. धीमन , विभागाध्यक्ष प्रो. मंदाकिनी प्रधान, प्रो. नीता सिंह डेनमार्क सरकार की मंत्री आन्या विले फ्रांस और कार्डिया हेल्थ केयर की सीईओ खुशबू वर्मा द्वारा किया गया।

इस ऐप की खास बात यह है कि जब कोई गर्भवती महिला इलाज के लिए पीजीआई आती है, तो उसी समय उसके मोबाइल फोन में यह एप्लीकेशन डाउनलोड कर दिया जाता है और उसे इसके उपयोग की पूरी जानकारी भी दी जाती है। इसके बाद महिला अपने नजदीकी किसी भी जांच केंद्र से कराई गई जांच रिपोर्ट—जैसे शरीर का वजन, ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, थायराइड की वैल्यू सहित अन्य आवश्यक सामान्य जानकारियां—आसानी से ऐप में अपलोड कर सकती है।

अब तक 555 से अधिक गर्भवती महिलाओं के मोबाइल में यह एप्लीकेशन डाउनलोड कराया जा चुका है और इन सभी का नियमित रूप से डिजिटल फॉलो-अप किया जा रहा है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम पीजीआई से ही इन महिलाओं की रिपोर्ट देख रही है और समय-समय पर आवश्यक सलाह प्रदान कर रही है।

रिपोर्ट के विश्लेषण के आधार पर डॉक्टर यह तय करते हैं कि गर्भावस्था सामान्य रूप से आगे बढ़ रही है या किसी प्रकार की जटिलता की आशंका है। यदि सब कुछ सामान्य रहता है तो महिला को इसकी सूचना ऐप के माध्यम से दे दी जाती है। वहीं, किसी भी प्रकार की परेशानी सामने आने पर तुरंत चिकित्सकीय परामर्श दिया जाता है और आवश्यकता पड़ने पर अगली जांच या अस्पताल आने की तिथि भी एप्लीकेशन के जरिए सूचित कर दी जाती है।

विभागाध्यक्ष प्रो. मंदाकिनी प्रधान और प्रो. नीता सिंह ने बताया कि इस पहल से हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं को बार-बार दूर से अस्पताल आने-जाने की परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी। इससे इलाज में सहूलियत बढ़ेगी और मां व शिशु दोनों की सेहत पर बेहतर निगरानी संभव हो सकेगी। कार्डिया हेल्थ केयर और संस्थान के बीच इस संबंध में एक एमओयू भी हस्ताक्षरित किया गया है।

स्थापना दिवस पर उपलब्धियां और आगामी योजनाएं

विभागाध्यक्ष प्रो. मंदाकिनी प्रधान, प्रो. इंदु लता साहू, प्रो. अमृत गुप्ता, प्रो. नीता सिंह और प्रो. संगीता यादव ने विभाग की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी—

-गर्भ में ही न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट, यूरेथ्रल वाल्व तथा जुड़वां गर्भ (ट्विन-टू-ट्विन ट्रांसफ्यूजन सिंड्रोम) की सर्जरी।
-हर महीने 2–3 गंभीर मामलों को नई उम्मीद।
-एक वर्ष में सभी फीटल सर्जरी सुविधाएं स्थापित करने की योजना।
-उत्तर भारत में फीटल सर्जरी का तीसरा बड़ा केंद्र बनने की दिशा में अग्रसर पीजीआई।
-1500 से अधिक गर्भस्थ शिशुओं को रक्त चढ़ाकर बचाया जा चुका है।
-मातृ एवं भ्रूण चिकित्सा में डीएम कोर्स शुरू करने की तैयारी।
-200 से अधिक डाउन सिंड्रोम, थैलेसीमिया सहित अन्य जेनेटिक बीमारियों से ग्रस्त बच्चों के जन्म को रोका गया।

इस पहल से मातृ एवं भ्रूण स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

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