हजपुरा, अंबेडकरनगर रमजानुल मुबारक का पाक महीना मुसलमानों के लिए रहमत, बरकत और मग़फ़िरत का पैग़ाम लेकर आता है। यह महीना केवल धार्मिक परंपरा तक सीमित नहीं, बल्कि तज्किया-ए-नफ़्स (आत्मशुद्धि), सब्र, तहज़ीब और इंसानियत की सीख देने का महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है। इस दौरान रोज़ा, नमाज़, तिलावत-ए-कुरआन, दुआ और ज़िक्रुल्लाह की विशेष अहमियत बताई गई है।
मुस्लिम समुदाय के लोग इस पवित्र माह में अधिक से अधिक इबादत में समय व्यतीत करते हुए कुरआन-ए-पाक की तिलावत करते हैं तथा अपने गुनाहों की तौबा कर अल्लाह तआला की रज़ा हासिल करने का प्रयास करते हैं। रमजान को सब्र-ओ-शुक्र और तक़वा (परहेज़गारी) की ऐसी तरबियतगाह माना गया है, जहां इंसान अपने नफ़्स और इच्छाओं पर नियंत्रण करना सीखता है।
जलालपुर तहसील क्षेत्र के कटघर मूसा निवासी एवं शिया धर्मगुरु मौलाना सैयद हैदर अब्बास ने रमजान की अहमियत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह महीना रूहानी तरक्की और अख़लाकी सुधार का माध्यम है। उन्होंने बताया कि रोज़ा केवल भूख और प्यास सहने का नाम नहीं, बल्कि गुस्सा, बुरी आदतों और नकारात्मक सोच पर नियंत्रण करने की अभ्यास प्रक्रिया है।
मौलाना ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि इस मुबारक महीने में इबादत के साथ-साथ जरूरतमंदों की मदद कर समाज में भाईचारा, अमन और मोहब्बत को बढ़ावा देना चाहिए, ताकि रमजान का वास्तविक संदेश समाज तक पहुंच सके।





