Wednesday, February 11, 2026
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AI से लैस ‘डिजिटल स्टेथोस्कोप’ से आसान होगी टीबी की जांच, लाखों मरीजों को फायदा मिलने की उम्मीद

दुनिया भर में टीबी आज भी सबसे घातक संक्रामक बीमारियों में से एक बना हुआ है, लेकिन अब चिकित्सा जगत में आर्टिफिशल इंटेलिजेंस एक नई क्रांति लेकर आया है। एक हालिया अध्ययन में यह बात सामने आई है कि AI से लैस ‘डिजिटल स्टेथोस्कोप’ टीबी की जांच में आ रही कमियों को दूर करने में एक बड़ा हथियार साबित हो सकता है।

टीबी आज भी दुनिया भर में संक्रामक बीमारियों से होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण बना हुआ है, लेकिन इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि लाखों मरीज ऐसे हैं, जो जांच के दायरे से बाहर रह जाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का एक डरावना आंकड़ा बताता है कि लगभग 27 लाख टीबी मरीजों को वर्तमान स्क्रीनिंग कार्यक्रमों में नजरअंदाज कर दिया जाता है।

इस गंभीर समस्या के बीच विज्ञान ने उम्मीद की एक नई किरण दिखाई है- और वह है ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वाला डिजिटल स्टेथोस्कोप’। एक नए अध्ययन के मुताबिक, यह स्मार्ट तकनीक उन दूर-दराज के इलाकों में भी मरीजों की जान बचाने में सक्षम है, जहां स्वास्थ्य सुविधाएं आसानी से नहीं पहुंच पातीं।

लाखों मरीज रह जाते हैं जांच से वंचित

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़े बताते हैं कि मौजूदा स्क्रीनिंग प्रोग्राम्स की सीमाओं के कारण लगभग 27 लाख टीबी के मरीज पहचान में ही नहीं आ पाते। कई बार बीमारी के लक्षण साफ नहीं होते या जांच की सुविधा महंगी और हर जगह उपलब्ध नहीं होती। इस कारण मरीजों की सही समय पर पहचान नहीं हो पाती, जिसे अब नई तकनीक से सुधारा जा सकता है।

कैसे काम करता है यह स्टेथोस्कोप?

जर्नल मेड में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, AI तकनीक बीमारी की उन बारीक आवाजों (साउंड बायोमार्कर) को पहचानने में सक्षम है, जिन्हें इंसानी कान नहीं सुन सकते। यह डिजिटल स्टेथोस्कोप खांसी और सांस लेने के दौरान फेफड़ों से आने वाली उन ध्वनियों का विश्लेषण करता है, जो सामान्य लग सकती हैं लेकिन वास्तव में बीमारी का संकेत होती हैं। इसे ‘आस्कल्टेशन’ कहा जाता है, जिसमें अब AI डॉक्टर की मदद करेगा।

महंगी मशीनों का बेहतरीन विकल्प

अभी तक टीबी की पहचान के लिए डब्लूएचओ द्वारा अल्ट्रा-पोर्टेबल रेडियोग्राफी और कंप्यूटर सॉफ्टवेयर की सिफारिश की जाती रही है। हालांकि, इन मशीनों की लागत बहुत ज्यादा होती है और रेडिएशन के खतरे के कारण गर्भवती महिलाओं के लिए इनका इस्तेमाल मुश्किल होता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि AI डिजिटल स्टेथोस्कोप एक सस्ता और सुरक्षित विकल्प है, जो उन दूर-दराज के इलाकों में भी काम आ सकता है जहां एक्सरे मशीनों की पहुंच नहीं है।

भारत समेत कई देशों में सफल अध्ययन

कनाडा की मैकगिल यूनिवर्सिटी के रिसर्चर मधुकर पाई और अन्य वैश्विक विशेषज्ञों ने बताया कि इस तकनीक ने फेफड़ों और दिल की बीमारियों को पकड़ने में काफी अच्छी सटीकता दिखाई है। भारत, पेरू, दक्षिण अफ्रीका, युगांडा और वियतनाम जैसे ज्यादा टीबी वाले देशों में किए गए अध्ययनों में इसे काफी उपयोगी पाया गया है। यह न केवल टीबी बल्कि अन्य बीमारियों की शुरुआती जांच में भी अच्छे नतीजे दे रहा है।

भविष्य की उम्मीद

विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक टीबी स्क्रीनिंग के महत्वपूर्ण अंतराल को भरने में सक्षम है। इसे और अधिक प्रभावी बनाने के लिए अलग-अलग माहौल में और ज्यादा मरीजों पर इसका परीक्षण किया जाना बाकी है, लेकिन यह स्पष्ट है कि AI डिजिटल स्टेथोस्कोप स्वास्थ्य सेवाओं में समानता लाने और छुपे हुए टीबी मरीजों को खोजने में एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

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