प्रदेश सरकार ने अवैध मदरसा संचालन और संदिग्ध विदेशी फंडिंग की जांच के लिए दो सदस्यीय एसआईटी का गठन किया है। यह टीम मदरसा शिक्षक शमशुल हुदा खान से जुड़े मदरसों, सोसाइटी और एनजीओ की जांच करेगी। आजमगढ़ के मंडलायुक्त और डीआईजी को एक सप्ताह में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। एटीएस और ईडी पहले ही इस मामले की जांच कर रहे हैं, जिसमें अधिकारियों की मिलीभगत भी सामने आई है।
लखनऊ। प्रदेश सरकार ने अवैध मदरसा संचालन और संदिग्ध विदेशी फंडिंग को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए मदरसा शिक्षक शमशुल हुदा खान से जुड़े मदरसों, सोसाइटी और एनजीओ की जांच के लिए दो सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआइटी) गठित कर दिया है।
एटीएस की जांच रिपोर्ट के आधार पर ईडी इस मामले की पहले ही जांच कर रहा है, अब एसआइटी भी इसकी जांच करेगी। आजमगढ़ के मंडलायुक्त और पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआइजी) को एक सप्ताह में जांच कर शासन को रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार के इस रुख से स्पष्ट है कि मदरसों की आड़ में आर्थिक गड़बड़ी, विदेशी फंडिंग या प्रशासनिक मिलीभगत किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
शमशुल वर्ष 2007 से ब्रिटेन में निवासरत था और वर्ष 2013 में उसने भारतीय नागरिकता त्यागकर ब्रिटिश नागरिकता ग्रहण कर ली थी। इसके बावजूद वह वर्ष 2017 तक आजमगढ़ के मदरसे में सहायक अध्यापक के रूप में कार्यरत रहा और इस दौरान सरकार से वेतन लेता रहा, बाद में उसे पेंशन का भुगतान भी किया गया।
एटीएस जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरे प्रकरण में मदरसा प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत रही है। प्रदेश सरकार अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक एसएन पांडेय, तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी साहित्य निकष सिंह, लालमन, प्रभात कुमार व इरशाद अहमद पहले ही निलंबित कर चुकी है।
आरोपित शमशुल हुदा से जुड़े दो मदरसों संतकबीरनगर स्थित मदरसा कुल्लियातुल बनातिर रजविया (निस्वा) व आजमगढ़ के मदरसा दारुल उलूम अहले सुन्नत मदरसा अशरफिया मिस्बाहुल उलूम, मुबारकपुर की मान्यता भी निलंबित हो चुकी है। अब इन दोनों ही मदरसों के संचालन तथा इससे जुड़े लोगों व सहयोगियों की आर्थिक व अवैधानिक गतिविधियों की जांच एसआइटी करेगी।
शमशुल द्वारा संचालित संतकबीरनगर के मदरसे के खिलाफ खलीलाबाद कोतवाली में मामला दर्ज कर शमशुल व उसके परिवार के नाम से सात बैंकों में मौजूद 18 खातों को फ्रीज कर दिए गए हैं। इन बैंकों में करीब 94.23 लाख रुपये की धनराशि निकालने पर रोक लगा दी गई है। शमशुल के खिलाफ एफआइआर दर्ज की जा चुकी है।
मामले में मदरसा प्रबंधक, दो तत्कालीन प्रधानाचार्य और एक लिपिक के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी गई है। मदरसे के विरुद्ध न्याय संहिता की धारा 318(4) और विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 के तहत मुकदमा दर्ज है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को भी इससे जुड़े और अभिलेख सरकार ने उपलब्ध करा दिए हैं।





