पूर्व लीबियाई नेता मुअम्मर गद्दाफी के बेटे सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी की पश्चिमी लीबिया के जिंतान स्थित उनके आवास पर हमलावरों ने हत्या कर दी। उनकी राजनीतिक टीम ने इस “कायरतापूर्ण हत्या” की पुष्टि की है। चार नकाबपोश बंदूकधारियों ने हमला किया, जिसकी गहन जांच की मांग की जा रही है। 2011 में पिता की हत्या के बाद सैफ को संभावित उत्तराधिकारी माना गया था।
पूर्व लीबियाई नेता मुअम्मर गद्दाफी के बेटे सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी का कत्ल कर दिया गया। मंगलवार को पश्चिमी लीबिया के शहर जिंतान में उनके आवास पर हमलावरों ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी।
सैफ अल-इस्लाम की राजनीतिक टीम ने इसकी पुष्टि की है। यह घटना दोपहर के समय हुई, जब चार मास्क पहने बंदूकधारियों ने उनके घर पर हमला बोल दिया।
हमलावरों ने पहले घर की निगरानी कैमरों को नष्ट कर दिया और फिर सीधे सैफ अल-इस्लाम को मार गिराया। उसकी राजनीतिक टीम के सदस्य अब्दुल्लाह ओथमान अब्दुर्रहीम ने फेसबुक पर इसकी जानकारी दी। टीम ने इसे “कायरतापूर्ण और विश्वासघाती हत्या” बताया है।
हमले की साजिश को लेकर जांच की हो रही मांग
सैफ अल-इस्लाम की राजनीतिक टीम ने लीबियाई न्यायपालिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि इस हमले की गहन जांच हो। हमलावरों की पहचान की जाए और जिन लोगों ने इस ऑपरेशन की साजिश रची, उन्हें सजा मिले। टीम का कहना है कि यह सिर्फ एक व्यक्ति की हत्या नहीं, बल्कि एक बड़े षड्यंत्र का हिस्सा हो सकता है।
फिलहाल त्रिपोली और जिंतान की स्थानीय अथॉरिटीज ने इस घटना की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। लेकिन लीबियाई मीडिया और कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने सैफ की मौत की खबर प्रसारित की है। जांच अभी शुरुआती दौर में है और हमलावर फरार बताए जा रहे हैं।
लीबिया में गद्दाफी परिवार की क्या है विरासत?
2011 में नाटो समर्थित विद्रोह के बाद मुअम्मर गद्दाफी की हत्या हो गई थी। उस समय सैफ अल-इस्लाम को उनके पिता का संभावित उत्तराधिकारी माना जाता था। वे लीबिया की राजनीति में काफी प्रभावशाली थे और विद्रोह के दौरान भी सक्रिय रहे। विद्रोह के बाद उन्हें जिंतान में गिरफ्तार कर लिया गया था, जहां कई सालों तक कैद में रहे।
2017 में उनकी रिहाई हुई और उसके बाद वे जिंतान में ही रह रहे थे। 2021 में उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की कोशिश की, लेकिन कई विवादों के कारण चुनाव प्रक्रिया ही रुक गई। सैफ अल-इस्लाम हमेशा से लीबिया की राजनीति में एक ध्रुवीकरण करने वाली शख्सियत रहे हैं। कुछ लोग उन्हें गद्दाफी युग का प्रतीक मानते हैं, तो कुछ उनके खिलाफ हैं।





