केंद्र सरकार के आगामी आम बजट से उत्तर प्रदेश को केंद्रीय करों, योजनाओं और ऋणों से लगभग 4.30 लाख करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है। इस धनराशि से राज्य सरकार अपने बजट का आकार निर्धारित करेगी और विकास योजनाओं की दिशा तय करेगी, जिससे प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में मदद मिलेगी। चालू वित्तीय वर्ष की तुलना में यह लगभग 37 हजार करोड़ रुपये अधिक है।
लखनऊ। रविवार को संसद में पेश किए जाने वाले केंद्र सरकार के आम बजट से राज्य को केंद्रीय करों में हिस्सेदारी, केंद्र सहायतित योजनाओं और अन्य मदों से लगभग 4.30 लाख करोड़ रुपये मिल जाने की उम्मीद है।
केंद्र से आवंटित होने वाले संभावित धनराशि के आधार पर राज्य सरकार न सिर्फ अपने बजट का आकार तय करेगी, बल्कि विकास योजनाओं की दिशा भी तय करेगी। इस आम बजट पर राज्य सरकार की निगाहें टिकी हैं।
केंद्रीय बजट से करों में हिस्सेदारी के साथ ही केंद्रीय योजनाओं, केंद्र सहायतित योजनाओं, केंद्रीय वित्त आयोग तथा ब्याजमुक्त ऋण योजना से मिलने वाली धनराशि को केंद्र में रखकर ही राज्य सरकार अगले वित्तीय वर्ष में राज्य में होने वाले प्रमुख विकास कार्यों को तय करेगी।
प्रदेश को वन ट्रिलियन डालर की अर्थव्यवस्था तक पहुंचाने के लिए विकास के मद में राज्य सरकार अपने बजट से अधिक धनराशि आवंटित करने की तैयारी में है। जिसमें केंद्र से मिलने वाली धनराशि का बड़ा योगदान रहेगा।
बताया जा रहा है कि केंद्रीय बजट से करों व शुल्कों में राज्यों को दी जाने वाली धनराशि से ही यूपी को लगभग 2.80 लाख करोड़ रुपये मिल सकते हैं।
केंद्र सहायतित योजनाओं के लिए एक लाख करोड़ रुपये से अधिक, केंद्रीय योजनाओं के लिए लगभग 15 हजार करोड़ रुपये, ब्याजमुक्त ऋण योजना में 20-22 हजार करोड़ रुपये तथा केंद्रीय वित्त आयोग से लगभग 12 हजार करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद की जा रही है। सभी मदों को मिलाकर लगभग 4.30 लाख करोड़ रुपये मिल जाने का अनुमान किया गया है।
चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में केंद्रीय करों व योजनाओं से कुल लगभग 3.92 लाख करोड़ रुपये राज्य को मिलने हैं।
केंद्रीय करों व शुल्कों में हिस्सेदारी के रूप में 2.55 लाख करोड़ रुपये, केंद्र सहायतित योजनाओं से लगभग 96 हजार करोड़ रुपये, केंद्रीय योजनाओं से लगभग 13 हजार करोड़ रुपये, केंद्रीय वित्त आयोग से लगभग 10 हजार करोड़ रुपये तथा ब्याजमुक्त ऋण योजना से लगभग 18 हजार करोड़ रुपये मिलने हैं।
इस वर्ष पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 के मुकाबले लगभग 37 हजार करोड़ रुपये अधिक मिलने हैं।





