मेटा के पूर्व AI कर्मचारी यान लुकेन ने सिलिकॉन वैली की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने बड़ी टेक कंपनियों को “एलएलएम-पिल्ड” बताया और आरोप लगाया कि वे नवाचार को दबाने के लिए AI रिसर्चर्स की भर्ती की होड़ में हैं। यान ने मेटा छोड़ने की वजह भी बताई, क्योंकि वह भी “एलएलएम-पिल्ड” हो गई थी।
मेटा के पूर्व AI साइंटिस्ट और ‘AI के गॉडफादर’ कहे जाने वाले यान लुकेन ने सिलिकॉन वैली की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने सिलिकॉन वैली की कई बड़ी कंपनियों को “एलएलएम-पिल्ड” बताया है। यान का कहना है कि सिलिकॉन वैली की बड़ी टेक कंपनियों में AI रिसर्चर्स की भर्ती की होड़ लगी है, जिसके पीछे का मकसद नवाचार को दबाना है।
यान के अनुसार, AI इंडस्ट्री एलएलएम (लॉन्ग लैंगवेज मॉडल) पर आधारित है। सिलिकॉन वैली में सभी इसपर काम कर रहे हैं। वो एक-दूसरे के इंजीनियर छीन लेते हैं। मगर, वो खुद कुछ नया करने की कोशिश नहीं करते हैं। सब यही कर रहे हैं।
यान ने क्यों छोड़ा मेटा का साथ?
मेटा कंपनी छोड़ने की वजह साफ करते हुए यान कहते हैं मेटा भी “एलएलएम-पिल्ड” हो गया था। यही वजह है कि मैंने मेटा छोड़ने का फैसला किया था। ये एक रणनीतिक फैसला था। हम सोच भी नहीं सकते हैं कि ऐसे एजेंटिक सिस्टम बनाए जा सकते हैं, जिसको यही नहीं पता कि उसके काम का परिणाम क्या हो सकता है?
यान के अनुसार, सच्चा एजेंटिक सिस्टम वो है, जो आपकी तरफ से सही फैसला ले सके। और जब तक एजेंटिक सिस्टम को अपने काम के परिणामों के बारे में न पता हो, तब तक ऐसा सिस्टम नहीं बनाया जा सकता है।
यान कहते हैं, “आमतौर पर इंसान कोई काम करता है, तो उसे पता होता है कि इसका क्या निष्कर्ष निकलेगा। मगर, एआई के केस में ऐसा बिल्कुल नहीं है। इसलिए हमें इसपर काम करना चाहिए।”
मेटा सुपरइंटेलिजेंस लैब
बता दें कि जून 2025 में मेटा कंपनी के संस्थापक मार्क जकरबर्ग ने मेटा सुपरइंटेलिजेंस लैब की सुरुआत की थी। इसका नेतृत्व एआई के पूर्व सीईओ अलेक्जेंडर वांग कर रहे हैं। इस प्रोजेक्ट के लिए 14.3 बिलियन डॉलर की परियोजना निर्धारित की गई है।





