Saturday, March 7, 2026
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जो अली का नहीं वो खुदा का नहीं,जो नबी का नहीं वो अली का नहीं

इटावा। मौलाए कायनात हज़रत अली की पैदाइश के खुशनुमा मौके पर राहत अक़ील की ओर से शरीफ मंज़िल सैदबाड़ा में मेहफ़िल का आयोजन किया गया।महफ़िल में शायरों ने मौला अली की शान में बेहतरीन कलाम पेश किए। महफ़िल का शुभारंभ मौलाना अनवारुल हसन ज़ैदी इमामे जुमा इटावा ने कुरान पाक की तिलावत से करते हुए कहा मौला अली की पैदाइश काबे में हुई यह मर्तबा न किसी और को मिला है और न ही कयामत तक किसी को मिलेगा।इसी तरह खाने काबे पर अली के बाद खुतबा देने का मर्तबा मौला अब्बास को मिला।

इसके अलावा काबे में खुतबा देने का किसी को मर्तबा नहीं मिला।सलीम रज़ा ने कहा रंजो अलम मिटाते हैं मौलाये कायनात,मुश्किल में काम आते हैं मौलाये कायनात।अख्तर अब्बास मोंटू ने कहा निशा दीवार का ये आज भी इकरार करता है,काबा टूटकर मौला अली से प्यार करता है।तनवीर हसन ने कहा अली अली है खुदा नहीं है मगर खुदा से जुदा नहीं है,खुदा नहीं है तुम्हारे दिल मे अगर अली की विला नहीं है।तसलीम रज़ा, सफीर हैदर,ताबिश रिज़वी,आबिद रज़ा, अर्श ने भी कलाम पेश किए।महफ़िल में हाजी अरशद मरगूब,मो.मियां,शावेज़ नक़वी,राहत हुसैन रिज़वी,अयाज हुसैन, आदिल अख़्तर गुडडू,ज़हूर नक़वी सहित बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लेकर हज़रत मौला अली की पैदाइश का जश्न मनाया।

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