मातमदारों के लिए जगह जगह रहा सबील पानी व चाय पानी की खास व्यवस्था
डुमरियागंज सिद्धार्थनगर। बुधवार को कस्बा हल्लौर में चेहलुम की आठवीं पर कस्बे की दोनों अंजुमनों ने अलम के साथ मातमी जुलूस निकला। जिसमें नंगे पैर बड़ी तादात में अकीदतमंदों ने शिरकत की। हाथों में मौला अब्बास का अलम और जुबान पर हज़रत अब्बास अलमदार से मंसूब नौहा, जिसे सुनकर हर अजादार की आंखें छलक पड़ी।
अरबी महीने की 18 सफर पर सुबह करीब दस बजे कस्बे की दो कदीमी अंजुमनों में क्रमश: अंजुमन गुलदस्ता मातम रजि० व अंजुमन फरोग मातम रजि० के बैनर तले अलम के साथ मातमी जुलूस दरगाह हजरत अब्बास से बरामद हुआ। करबला के शहीदों व हजरत अब्बास से मंसूब नौहा पढ़ते लोग पूरे दिन कस्बे के विभिन्न रास्तो से गुजरते मातम करते रहे। जुलूस कस्बे के सभी प्रमुख मार्गों से होता हुआ अपराह्न चार बजे मुख्य मार्ग यानी डुमरियागंज-बस्ती मार्ग पर पहुंचा। आगे-आगे छोटे-बड़े हुसैनी शैदाईयों के हाथों में हजरत अब्बास का अलम और पीछे सड़क पर दो लाइनों में मातम करते मातमदार।
नौहा खां हजरत अब्बास से मंसूब नौहे पढ़ रहे थे तो मातमदार मातम कर रहे थे। करीब दो घंटे तक यहां नौहा-मातम का सिलसिला चलता रहा। इसके बाद जुलूस वापस कस्बे में गया जहां अन्य हिस्से में नौहा-मातम करता हुआ शाम को हज़रत अब्बास की दरगाह में पहुंचा। जहाँ कदीमी मजलिस बरपा हुई। जिसको पढ़ते हुए जाकिरे अहलेबैत शजर हैदर जैगम ने हजरत अब्बास के फजायल व मसायब अपने मखसूस अंदाज में बयान किये। बुधवार को शिया मुसलमानों द्वारा मनाये जाने वाला चेहलुम की आठवीं पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए पुलिस प्रशासन मुस्तैद दिखाई दिया।





