उरई(जालौन)।उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ जनपद जालौन के जिलाध्यक्ष विद्या सागर मिश्र ने प्रेस को दी विज्ञप्ति में बताया कि कम छात्र बाले परिषदीय स्कूलों के विलय का उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ पुरजोर विरोध करेगा। इसके लिए जिला स्तर पर एक मीटिंग कर आंदोलन की रणनीति बनायी जाएगी ।उन्होंने इस निर्णय को बच्चों के शिक्षा के अधिकार और भविष्य पर हमला बताया।
उन्होंने बताया कि 6-14बर्ष की आयु के सभी बच्चों को निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराई जाए इस अभियान के अंतर्गत ,एवम सर्व शिक्षा अभियान के तहत सरकार ने विश्व बैंक की सहायता एवम अपनी मद से प्रत्येक गांव ब मजरे में प्राथमिक विद्यालय एवम प्रत्येक दो किलोमीटर पर उच्च प्राथमिक विद्यालय की स्थापना कर तमाम संसाधन उपलब्ध कराए। जिससे गरीब, मजदूर, किसान के बच्चे अपने गाँव मे शिक्षा ग्रहण कर रहे थे। कई मजदूर परिबार के बच्चे पास स्कूल होने के कारण शिक्षा ग्रहण भी कर रहे थे और मध्य अवकाश में अपने अभिभावकों को जो खेतो में कृषि कार्य मे लगे हैं उनको खाना दे आते थे। और पूर्ण अबकाश के बाद तुरन्त अपने अभिभावकों को कृषि एवम अन्य कार्य मे हाथ बंटाते थे। अब सरकार के द्वारा कम संख्या बाले विद्यालय विलय किये जाने की योजना बनाई गई। जो सीधा प्रभाव उन गरीब परिवार,कृषि कार्य मे लगे परिवारों के बच्चों पर पड़ेगा जो कृषि कार्य या अन्य जीविका जैसे पशु पालन, मुर्गी पालन में सहयोग करते थे। अब वे बच्चे दूर स्कूल होने के कारण स्कूल नही जा पाएंगे। कई गांव विद्यालय विहीन हो जाएंगे।
विभाग में पदोन्नति भी नही हो पाएगी जो अध्यापक जिस पद पर नियुक्त होगा उसी पद से सेबनिव्रत हो जायेगा। पहले भी सरकार के द्वारा एक प्रांगण में प्राथमिक विद्यालय और जूनियर विद्यालय को विलय कर हजारों पद खत्म कर चुकी है। शिक्षकों की कम मांग के कारण जो बच्चे बीएड बी टी सी ,बीएलएड ,करके बैठे हैं या कर रहे हैं उनका अध्यापक बनने का सपना टूट जाएगा। उनके लिए फिर कोई भर्ती नही निकलेगी। उन्होंने माननीय मुख्यमंत्री महोदय से मांग की है कि समाज हित को देखते हुए सहानुभूति पूर्वक विचार कर परिषदीय कम छात्र बाले स्कूलों के विलय की कार्यवाही रोकी जाए।





